फर्जी मजदूरी, फर्जी बिल और घटिया निर्माण से उड़ा सरकारी पैसा
गरियाबंद / फिंगेश्वर :- फिंगेश्वर विकासखंड के ग्राम पंचायत सेंदर के आश्रित ग्राम परसट्टी में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और अनियमितताओं का मामला उजागर हुआ है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन को सौंपे गए आवेदन में गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि वित्तीय वर्ष 2023-25 के दौरान पंचायत और भू-संरक्षण विभाग की मिलीभगत से सरकारी राशि का भारी दुरुपयोग किया गया है।
गांव के नहीं, बाहर के मजदूरों का नाम मस्टर रोल में

ग्रामीणों ने बताया कि मस्टर रोल (हाजिरी रजिस्टर) में ऐसे मजदूरों के नाम दर्ज किए गए हैं जो गांव के निवासी ही नहीं हैं। आरोप है कि मजदूरों के नाम राजिम, भसेरा, बिजली, पेंड्रा, कौनदकेरा और आसपास के गांवों से फर्जी रूप से जोड़े गए हैं, जबकि इनमें से कई व्यक्ति कार्यस्थल पर कभी आए ही नहीं।
ग्रामीणों ने कहा कि यह पूरी तरह से फर्जीवाड़ा है — जिन्होंने एक दिन भी काम नहीं किया, उनके नाम पर हाजिरी लगाई गई और भुगतान उठा लिया गया।
स्थानीय मजदूरों को काम से वंचित रखकर मनरेगा अधिनियम की भावना के विपरीत कार्रवाई की गई है।
ग्रामीणों का सवाल है कि जब स्थानीय मजदूरों को प्राथमिकता देने का स्पष्ट प्रावधान है, तो फिर बाहरी नामों को क्यों जोड़ा गया और स्थानीय लोगों को रोजगार से क्यों वंचित रखा गया?
गुणवत्ता पर उठे सवाल — “2300 बोरी सीमेंट का हिसाब नहीं”
ग्रामीणों के अनुसार, पंचायत में हुए निर्माण कार्यों — गली कांक्रीटीकरण, मुक्तिधाम, स्टॉप डेम, नाली निर्माण, कुड़ेदान और शौचालय निर्माण — में न तो गुणवत्ता रही और न पारदर्शिता।
चेक डेम में बिलों में 2300 बोरी सीमेंट उपयोग दर्शाई गई है,
जबकि मौके पर इतनी मात्रा दिखाई नहीं देती। ग्रामीणों का कहना है कि अगर वास्तव में इतनी सीमेंट का उपयोग हुआ होता, तो निर्माण कार्य की मजबूती और गुणवत्ता नजर आती।
ग्रामीणों ने भौतिक सत्यापन (फिजिकल वेरिफिकेशन) की मांग की है ताकि यह साबित किया जा सके कि कागजों में जो दर्शाया गया है, वह जमीन पर कितना सच है।
फर्जी जीएसटी बिल का खेल
जांच में यह भी सामने आया कि कई फर्जी जीएसटी बिलों का उपयोग किया गया है। जिन व्यक्तियों या दुकानों का गांव में कोई व्यवसाय या पंजीकृत फर्म नहीं है, उनके नाम पर बिल बनाकर भुगतान किया गया।
जीएसटी अधिनियम 2017 के तहत केवल वही व्यक्ति वैध बिल जारी कर सकता है जो जीएसटी पोर्टल पर पंजीकृत हो और वास्तविक लेनदेन करे। ऐसे में यह कार्रवाई वित्तीय अपराध की श्रेणी में आती है और कर कानून का उल्लंघन है।

“जमीन पर अधूरा, कागज पर पूरा” — ग्रामीणों का आरोप
ग्रामीणों का कहना है कि कई निर्माण कार्य अधूरे पड़े हैं, लेकिन भुगतान पूरा कर दिया गया। यह सब कुछ भू-संरक्षण विभाग और पंचायत सचिव की मिलीभगत से किया गया है।
ग्रामीणों ने बताया कि एक माह पूर्व कलेक्टर को शिकायत दी गई थी, लेकिन अब तक न जांच हुई, न कार्रवाई।
ग्रामीणों ने उठाए गंभीर सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि यह घोटाला केवल पंचायत स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें तकनीकी सहायक, इंजीनियर और भू-संरक्षण विभाग के अधिकारी-कर्मचारी भी शामिल हो सकते हैं।
उन्होंने कहा कि सवाल यह है कि —
“क्या मस्टर रोल का वेरिफिकेशन नहीं किया गया?
क्या तकनीकी सहायक और इंजीनियर ने बिना स्थल निरीक्षण के बिल पास कर दिए? क्या विभागीय अधिकारी इस फर्जीवाड़े में शामिल हैं?”
अगर ऐसा है, तो यह पूरा मामला एक संगठित भ्रष्टाचार चक्र (ऑर्गनाइज्ड फ्रॉड नेटवर्क) की ओर इशारा करता है।
ग्रामीणों ने मांग की है कि सभी जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर तत्काल कार्रवाई की जाए।
ग्रामीणों की प्रमुख मांगें
सभी निर्माण कार्यों की तकनीकी जांच और सामाजिक अंकेक्षण (सोशल ऑडिट) कराया जाए।
फर्जी बिल, मस्टर रोल और भुगतान की आर्थिक जांच (ऑडिट) की जाए।
दोषी पंचायत सचिव, विभागीय अधिकारी और ठेकेदारों पर FIR दर्ज कर कठोर कार्रवाई की जाए।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि —
“अगर शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई, तो हम जिला मुख्यालय में धरना-प्रदर्शन करेंगे और मुख्यमंत्री तथा लोकायुक्त से उच्चस्तरीय जांच की मांग करेंगे।”
गरियाबंद एक्सप्रेस न्यूज़ की अपील
जिला प्रशासन से गरियाबंद एक्सप्रेस न्यूज़ का आग्रह है कि वह इस गंभीर वित्तीय अनियमितता का तुरंत संज्ञान ले और भू-संरक्षण विभाग एवं पंचायत के कार्यों की निष्पक्ष जांच कराए।
जनता के टैक्स का पैसा जनता के विकास के लिए है,
भ्रष्टाचारियों की जेबें भरने के लिए नहीं।
अगर फर्जी जीएसटी बिल लगया हो तो जाँच हो की बिल धारक क़े पास फर्म एवं दुकान है की नही.और जाँच कऱ एफ आई आर किया जाए. ताकि इस तरह से फर्जी जीएसटी बिल लगाकर शासन प्रशासन को चुना न लगा सके
Author: थनेश्वर बंजारे
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