रेत माफियाओं के आगे बेबस सिस्टम? कार्रवाई खत्म, खेल शुरू!धड़ल्ले से चल रहा अवैध उत्खनन
मुख्यमंत्री के सख्त निर्देशों की अवहेलना क्या 1076 मे शिकायत निवारण भी होगा फेल
गरियाबंद/राजिम -:गरियाबंद जिले में अवैध रेत उत्खनन का मुद्दा एक बार फिर सुर्खियों में है। चौबेबांधा-सिंधौरी क्षेत्र में खनिज विभाग और राजिम पुलिस द्वारा संयुक्त कार्रवाई कर एक चैनमाउंटेन मशीन और एक हाइवा वाहन जप्त किए जाने के बाद कार्रवाई की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े होने लगे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई बार कार्रवाई के कुछ ही समय बाद उसी क्षेत्र में दोबारा उत्खनन और परिवहन शुरू हो जाता है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार 9 जून से 15 अक्टूबर तक रेत खदानों का संचालन बंद है। इसके बावजूद जिले के विभिन्न नदी घाटों से अवैध उत्खनन और परिवहन की शिकायतें लगातार मिल रही हैं। ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि शिकायतें, सीएम हेल्पलाइन में आवेदन और प्रशासन को सूचना देने के बावजूद कई स्थानों पर अवैध गतिविधियां नहीं रुक रही हैं।
गौरतलब है कि हाल ही में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने समीक्षा बैठक के दौरान अधिकारियों को अवैध खनन, परिवहन और भंडारण पर कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा था कि किसी भी स्थिति में अवैध खनन को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। ऐसे में गरियाबंद जिले में लगातार सामने आ रही शिकायतों ने प्रशासनिक अमले की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि कार्रवाई के तुरंत बाद फिर से खनन शुरू हो जाता है, तो केवल मशीन और वाहन जप्त करने से समस्या का समाधान नहीं होगा। जरूरत उन लोगों तक पहुंचने की है जो पूरे नेटवर्क को संचालित करते हैं। लोगों की मांग है कि जिले में सक्रिय अवैध रेत कारोबार की निष्पक्ष जांच कर यह पता लगाया जाए कि आखिर किन लोगों के संरक्षण में यह कारोबार लगातार जारी है।
हालांकि किसी जनप्रतिनिधि, अधिकारी या अन्य व्यक्ति की संलिप्तता का कोई आधिकारिक प्रमाण सामने नहीं आया है, लेकिन लगातार सामने आ रही शिकायतों और कार्रवाई के बाद भी जारी गतिविधियों ने जनता के मन में कई सवाल खड़े कर दिए हैं। लोग यह जानना चाहते हैं कि जब मुख्यमंत्री स्वयं अवैध खनन के खिलाफ सख्ती के निर्देश दे चुके हैं, तब भी प्रतिबंध अवधि में रेत का अवैध कारोबार कैसे जारी है।
जिलेवासियों का मानना है कि यदि प्रशासन वास्तव में अवैध रेत उत्खनन पर रोक लगाना चाहता है तो केवल औपचारिक कार्रवाई के बजाय लगातार निगरानी, नियमित छापेमारी, अवैध परिवहन पर सख्त नियंत्रण और दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करनी होगी। अन्यथा हर बार की तरह जप्ती की खबरें सुर्खियां बनेंगी और कुछ समय बाद फिर वही हालात दिखाई देंगे।
अब जिले की जनता की निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं। सवाल केवल अवैध खनन का नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री के निर्देशों के प्रभावी क्रियान्वयन का भी है। जनता जानना चाहती है कि आखिर प्रतिबंध अवधि में जारी इस खेल पर स्थायी रोक कब लगेगी और मुख्यमंत्री के आदेशों की अवहेलना करने वालों पर जवाबदेही कब तय होगी।
Author: थनेश्वर बंजारे
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