संघर्ष से सफलता तक…रेंट वाला घर से ‘बॉबी’ का बड़ा धमाका! गरियाबंद का लड़का अब OTT में मचाएगा तहलका मुंबई की मायानगरी में शुरू हुआ स्टार बनने का सफर

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गरियाबंद। छोटे जिले से बड़े सपने देखने वाले युवाओं के लिए एक जबरदस्त मिसाल सामने आई है। गरियाबंद का होनहार कलाकार अमन तिवारी उर्फ बाबीअब मुंबई की मायानगरी में अपनी पहचान बनाने के लिए पूरी तरह तैयार है। उनकी नई वेब सीरीज़ रेंट वाला घरके जरिए बाबी OTT प्लेटफॉर्म पर एंट्री करने जा रहे हैं, जिसे लेकर जिलेभर में उत्साह का माहौल है।

 

बाबी का ये सफर कोई रातों-रात मिला मुकाम नहीं, बल्कि सालों की कड़ी मेहनत, संघर्ष और जुनून का नतीजा है। इससे पहले भी वे वेब सीरीज़ सरकारी अफसरमें नजर आ चुके हैं और छत्तीसगढ़ के चर्चित प्रोडक्शन हाउस एन. माही प्रोडक्शन की फिल्म मोह और मायामें बतौर अभिनेता और असिस्टेंट डायरेक्टर अपनी छाप छोड़ चुके हैं। खास बात यह है कि यह फिल्म बड़े थिएटर में रिलीज हुई थी, जिससे उनके टैलेंट को व्यापक पहचान मिली।

 

अमन का अभिनय सफर बचपन से ही शुरू हो गया था, लेकिन इसे प्रोफेशनल रूप तब मिला जब उन्होंने गुजरात की एम.एस. यूनिवर्सिटी, बड़ोदा से तीन साल तक थिएटर की पढ़ाई की। इसके बाद दिल्ली, मुंबई, लखनऊ और नागपुर जैसे बड़े शहरों में लगातार थिएटर कर अपनी एक्टिंग को निखारा। वे नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (दिल्ली) के प्रतिष्ठित भारत रंग महोत्सवजैसे बड़े मंच पर भी दो बार प्रदर्शन कर चुके हैंजो किसी भी कलाकार के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जाती है।

 

बाबी कहते हैं, “सफलता एक दिन में नहीं मिलती, लेकिन अगर मेहनत और जुनून सच्चा हो, तो मंज़िल जरूर मिलती है।वे अपनी सफलता का पूरा श्रेय अपने माता-पिता को देते हैं, जिनका साथ हर मुश्किल में उनके साथ रहा।

 

फिलहाल बाबी मुंबई और दिल्ली में अपनी आगामी वेब सीरीज़ रेंट वाला घरकी शूटिंग में व्यस्त हैं। उनका अगला लक्ष्य बड़े बैनर की फिल्मों में काम करना है और जिस रफ्तार से वे आगे बढ़ रहे हैं, उसे देखकर लगता है कि वह दिन दूर नहीं।

 

गरियाबंद के वरिष्ठ पत्रकार ज्ञानेश तिवारी ने बेटे बाबीकी इस बड़ी सफलता पर गर्व जताते हुए एक भावुक और प्रेरणादायक बात कही। उन्होंने बताया कि उन्होंने अपने दोनों बच्चों को हमेशा पढ़ाई के साथ-साथ हर तरह की एक्टिविटी में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कियाचाहे वह ड्रामा हो, स्पोर्ट्स हो या अन्य रचनात्मक गतिविधियां।उन्होंने जोर देकर कहा कि बच्चों पर कभी भी किसी एक दिशा का दबाव नहीं डालना चाहिए। हर बच्चे की अपनी अलग पहचान और रुचि होती है। हमें यह समझना चाहिए कि उन्हें किस चीज में खुशी मिलती है, किस काम में उनका मन लगता है। जब हम उनकी रुचि को पहचान लेते हैं, तो वही उनका असली रास्ता बन जाता है,” उन्होंने कहा।सही मार्गदर्शन और खुला माहौल ही बच्चों को ऊंचाइयों तक पहुंचाता है। अगर हम बच्चों को उनकी पसंद के अनुसार आगे बढ़ने दें और उन्हें सपोर्ट करें, तो वे न सिर्फ खुद सफल होते हैं, बल्कि परिवार और समाज का नाम भी रोशन करते हैं,” उनकी यह सोच आज बाबी की सफलता के रूप में सामने आई है, जो यह साबित करती है कि जब जुनून को सही दिशा मिलती है, तो छोटे शहर का बच्चा भी बड़े मंच पर चमक सकता है।

 

गरियाबंद जैसे छोटे जिले से निकलकर OTT प्लेटफॉर्म तक पहुंचना सिर्फ बाबी की उपलब्धि नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के युवाओं के लिए एक बड़ी प्रेरणा है।

अब सबकी नजर इस पर टिकी हैक्या रेंट वाला घरसे बाबी बनेंगे OTT के नए सुपरस्टार? जवाब जल्द सामने होगा

थनेश्वर बंजारे
Author: थनेश्वर बंजारे

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