महिला-आरक्षण से जुड़ा बिल गिरने के बाद एनडीए आक्रामक, शुरू करेगा देशव्यापी आंदोलन

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नई दिल्ली। एक तेज राजनीतिक जवाबी हमले के तौर पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और उसके राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के सहयोगियों ने विपक्ष को निशाना बनाते हुए एक बड़े देशव्यापी विरोध अभियान की घोषणा की है.यह ऐलान संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 के लोकसभा में पारित न हो पाने के कुछ ही घंटों बाद किया गया. यह विधेयक अनिवार्य दो-तिहाई बहुमत हासिल करने में विफल रहा था. पार्टी के शीर्ष सूत्रों के अनुसार बीजेपी ने अपनी राज्य इकाइयों को पूरे भारत में सभी जिला मुख्यालयों पर समन्वित प्रदर्शन आयोजित करने का निर्देश दिया है.इस अभियान का उद्देश्य लैंगिक समानता की दिशा में एक ऐतिहासिक छलांग को रोकने में विपक्ष की भूमिका को बेनकाब करना है. इन विरोध प्रदर्शनों का लक्ष्य विधेयक के पक्ष में जनमत जुटाना और विधायी निकायों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित करना है.राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ने आज से विपक्षी पार्टियों के खिलाफ देशव्यापी विरोध प्रदर्शन शुरू करने का फैसला किया है. सभी सदस्य पार्टियों को सोशल मीडिया, सड़क पर विरोध प्रदर्शन और किसी भी अन्य तरीके से जिसे वे सही समझें, प्रचार करने का निर्देश दिया गया है.इन प्रदर्शनों में बीजेपी महिला मोर्चा अहम भूमिका निभाएगा. वे लोगों तक पहुँचने की कोशिशों में सबसे आगे रहेंगे और अलग-अलग इलाकों की महिलाओं से जुड़कर जागरूकता फैलाएंगे और समर्थन जुटाएंगे. उम्मीद है कि वरिष्ठ महिला नेता और पार्टी कार्यकर्ता इस बड़े जमीनी स्तर के अभियान को आगे बढ़ाने में सक्रिय रूप से हिस्सा लेंगे.पार्टी नेताओं ने कहा कि पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में होने वाले आगामी चुनावों के दौरान महिलाओं के लिए आरक्षण का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया जाएगा. बीजेपी इस बिल को एक अहम चुनावी मुद्दा बनाने की योजना बना रही है और महिलाओं के सशक्तिकरण के प्रति अपने समर्थन की तुलना विपक्षी पार्टियों के कथित विरोध से करेगी.पार्टी ने जोर देकर कहा कि महिला आरक्षण संशोधन बिल भारत के लोकतांत्रिक ढांचे में ज्यादा लैंगिक समानता सुनिश्चित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है. प्रदर्शनों का मुख्य जोर सरकार के इस इरादे पर होगा कि वह 2029 तक आरक्षण लागू कर देगी. इसकी तुलना एनडीए विपक्षी पार्टियों के बाधा डालने वाले और पीछे ले जाने वाले रवैये से करेगा.ये विरोध प्रदर्शन शुक्रवार को लोकसभा में हुई नाटकीय घटनाओं की सीधी प्रतिक्रिया है. हालाँकि सरकार साधारण बहुमत हासिल करने में कामयाब रही, लेकिन वह किसी भी संशोधन के लिए जरूरी संवैधानिक सीमा तक नहीं पहुँच पाई. तीनों बिलों पर बहस के बाद हुए मतदान में 298 सदस्यों ने बिल का समर्थन किया जबकि 230 सदस्यों ने इसके खिलाफ वोट दिया.लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने मतदान के नतीजों की घोषणा की. उन्होंने कहा, संविधान (131वाँ संशोधन) बिल पास नहीं हो पाया, क्योंकि सदन में वोटिंग के दौरान इसे दो-तिहाई बहुमत नहीं मिल पाया.

थनेश्वर बंजारे
Author: थनेश्वर बंजारे

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