नई दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को उस याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया जिसमें केंद्र को जाति जनगणना रोकने का निर्देश देने की मांग की गई थी, और याचिका में इस्तेमाल की गई भाषा के लिए याचिकाकर्ता की कड़ी आलोचना की. यह मामला चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की बेंच के सामने आया.शुरुआत में ही सीजेआई याचिकाकर्ता द्वारा याचिका में इस्तेमाल की गई भाषा से नाराज हो गए. उन्होंने कहा कि आपने अपनी याचिका में अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया है.प्रधान न्यायाधीश ने व्यक्तिगत रूप से पेश हुए याचिकाकर्ता से कहा, ”आपने अपनी याचिका में अभद्र भाषा लिखी है. आपकी याचिका किसने लिखी है?ÓÓ सीजेआई ने कहा, आप कहां से ऐसी भाषा लिखते हो याचिका में.बेंच ने उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें केंद्र को एक बच्चे वाले परिवारों को आर्थिक मदद देने के लिए पॉलिसी बनाने का निर्देश देने की भी मांग की गई थी.फरवरी में सुप्रीम कोर्ट ने 2027 की आम जनगणना में नागरिकों के जाति डेटा को रिकॉर्ड करने, वर्गीकृत करने और सत्यापित करने के लिए अपनाए जाने वाली प्रक्रिया पर सवाल उठाने वाली एक अलग पीआईएल पर सुनवाई करने से मना कर दिया था. 2027 की जनगणना, जो आधिकारिक तौर पर 16वीं नेशनल जनगणना होगी, 1931 के बाद पहली बार होगी जिसमें पूरी जाति की गिनती शामिल होगी और यह देश की पहली पूरी तरह से डिजिटल जनगणना होगी.
Author: थनेश्वर बंजारे
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