गरियाबंद-:गरियाबंद जिले के दूरस्थ एवं वनांचल क्षेत्रों में स्थित 53 ग्राम वर्तमान में सौर ऊर्जा के माध्यम से विद्युतीकृत हैं। छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड के कार्यपालन अभियंता ने जानकारी देते हुए बताया कि इन गांवों में भूतबेड़ा, कोचेंगा, कोकड़ी, गरहाडीह, गौरगांव, शोभा, अड़गड़ी, गोना के पाराटोला सहित अन्य आश्रित ग्राम शामिल हैं। उन्होंने बताया कि जिले के मैनपुर विकासखंड के 45 ग्राम एवं गरियाबंद विकासखंड के 08 ग्राम, कुल 53 ग्राम गैर-परंपरागत (ऑफग्रिड) सौर ऊर्जा प्रणाली से विद्युतीकृत हैं। इन गांवों में स्थापित सौर संयंत्रों का संचारण एवं संधारण कार्य क्रेडा विभाग द्वारा किया जा रहा है। अब इन सभी गांवों को परंपरागत ग्रिड प्रणाली से जोड़ने हेतु प्रस्ताव उच्च कार्यालय को भेजा गया है। प्रस्तावित योजना के तहत कुल 278.60 किलोमीटर 11 केव्ही लाइन, 103.09 किलोमीटर एलटी लाइन तथा 174 ट्रांसफार्मर स्थापित किए जाने हैं। इस संपूर्ण कार्य के लिए लगभग 849.49 करोड़ रुपये के भारी-भरकम बजट की आवश्यकता आंकी गई है। कार्यपालन अभियंता ने बताया कि इन गांवों में राजापड़ाव क्षेत्र के ग्राम भी शामिल हैं, जो संरक्षित वन क्षेत्रों के अंतर्गत आते हैं। केन्द्रीय विद्युत प्राधिकरण के प्रावधानों के अनुसार राष्ट्रीय उद्यान, वन्यजीव अभ्यारण्य, संरक्षण रिजर्व एवं सामुदायिक रिजर्व क्षेत्रों में 33 केव्ही एवं उससे कम वोल्टेज की विद्युत लाइनें भूमिगत केबल के माध्यम से ही बिछाई जानी होती हैं। इसके लिए वन विभाग से अनुमति की प्रक्रिया फिलहाल जारी है।
बताया गया कि अनुमानित लागत में वन संरक्षण अधिनियम (FCA) के अंतर्गत लागू शुल्क भी शामिल है तथा प्राक्कलन राशि की गणना सेड्यूल ऑफ रेट 2025-26 के अनुसार की गई है। अत्यधिक बजट एवं फंड की आवश्यकता को देखते हुए इन गांवों का ग्रिड विद्युतीकरण तभी संभव होगा, जब किसी उपयुक्त योजना में चयन हो, बजट स्वीकृत किया जाए और वन विभाग से आवश्यक अनुमति प्राप्त हो।
जिले के इन सुदूर गांवों के लिए सौर ऊर्जा फिलहाल जीवनरेखा बनी हुई है, वहीं ग्रिड बिजली की राह बजट और अनुमति की बाधाओं से होकर गुजर रही
Author: थनेश्वर बंजारे
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