कलेक्टर साहब इधर भी निरीक्षण कीजिए—घाट निर्माण के नाम पर नवीन मेला मैदान को गड्ढों में बदला गया, सुरक्षा पर बड़ा सवाल

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गरियाबंद /राजिम-:आगामी फरवरी में होने वाले राजिम कुंभ कल्प मेला की भव्य तैयारी के बीच नवीन मेला मैदान में चल रहे निर्माण कार्य पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

 

घाट निर्माण के लिए स्वीकृत राशि का उपयोग करते हुए निर्माण एजेंसी ने मिट्टी बाहर से मंगवाने के बजाय सीधे 54 एकड़ के आरक्षित नवीन मेला मैदान की समतल भूमि को ही खोद डाला। जेसीबी से 12 से 15 फीट तक की गहरी खुदाई के चलते मैदान अब बड़े-बड़े गड्ढों में बदल गया है।

स्थानीय नागरिकों ने चिंता जताते हुए कहा कि इतनी गहराई वाले गड्ढे किसी भी समय बड़ा हादसा करा सकते हैं। यहां रोज़ मवेशी पानी और चारे के लिए आते हैं, जो इन खतरनाक गड्ढों की वजह से दुर्घटना के जोखिम में हैं।

 

लोगों का कहना है कि क्षेत्र में 11 करोड़ की लागत से घाट निर्माण की स्वीकृति है, पर ठेकेदार बाहर से सामग्री लाने के बजाए मैदान को ही ‘खदान’ की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं।

 

*54 एकड़ नवीन मेला मैदान—ऐसे बदला स्वरूप*

 

पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह, पूर्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल और पूर्व विधायक संतोष उपाध्याय के प्रयासों से यह जमीन नवीन मेला मैदान के नाम से आरक्षित की गई थी। कांग्रेस शासनकाल में भी इसी मैदान में आयोजन की चर्चा होती रही, लेकिन काम शुरू नहीं हो पाया। 2025 में BJP सरकार आते ही यहां विशाल कुंभ कल्प मेला सफलतापूर्वक संपन्न हुआ, जिसमें लाखों श्रद्धालु पहुंचे।

सरकार की मंशा इस मैदान को स्थाई सुविधाओं से लैस करने की है—

 

✔ 35/11 केवी सब स्टेशन तैयार

 

✔ लक्ष्मण झूला से नवीन मेला मैदान तक फोरलेन सड़क मंजूर

 

✔ चौबे बांधा तिराहा–परसवानी–नवागांव सड़क को 43 करोड़ की स्वीकृति

 

✔ तटबंध से लगाकर घाट निर्माण हेतु 11 करोड़ की मंजूरी

लेकिन इसी प्रक्रिया में अब मैदान को गहरे गड्ढों का क्षेत्र बना दिया गया है।

 

मेला के समय भी मैदान से ही निकाला गया था मुरूम—आज भी गड्ढे जस के तस

फरवरी 2025 में हुए मेले के दौरान अस्थाई सड़क और मैदान समतल करने के लिए भी यहीं से भारी मात्रा में मुरूम निकाला गया था।

 

✔ 15–20 फीट गहरी खुदाई

 

✔ सैकड़ों हाईवा मुरूम निकाला गया

 

✔ आज भी गड्ढे जस के तस

 

✔ उस समय भी अधिकारी मौक़े पर मौजूद थे, फिर भी रोक नहीं लगी

 

स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह सब विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत के बिना संभव ही नहीं है। ठेकेदार का इंजीनियर कहता है—“पहले मिट्टी निकाल रहे हैं, बाद में पाट देंगे।” लेकिन लोगों का सवाल है—

 

क्या मेले से पहले यह मैदान फिर से समतल हो पाएगा? और अगर नहीं, तो सुरक्षा का जिम्मेदार कौन?

 

“नवीन मेला मैदान का कोई मालिक नहीं”—लोगों में आक्रोश

गांव और शहर में चर्चा है कि मैदान की देखरेख के नाम पर कोई स्पष्ट जवाबदेही नहीं है।

 

करोड़ों की परियोजनाओं के बीच इस मैदान को बिना मानक और बिना सुरक्षा के खुदाई के लिए छोड़ देने पर लोग नाराज हैं।

 

*स्थानीय नागरिकों की मांग है कि—*

➡ कलेक्टर स्वयं स्थल का निरीक्षण करें

➡ ठेकेदार की मनमानी पर रोक लगे

➡ मैदान में तुरंत बैरीकेटिंग व चेतावनी पट्टिकाएं लगाई जाएं

➡ आगे से मिट्टी बाहर से मंगाने का स्पष्ट निर्देश जारी हो

 

लोगों का कहना है कि जमीन को समतल करने के लिए पहले से ही यहां मुरूम और मिट्टी की जरूरत है, और उसी जगह को बार-बार खोदकर मैदान की मूल संरचना नष्ट की जा रही है।

अब निगाहें प्रशासन पर—क्या होगी कार्रवाई?

 

आमजन की मांग साफ है—कलेक्टर साहब, कृपया यहां भी निरीक्षण कीजिए

 

नवीन मेला मैदान की यह स्थिति न केवल भविष्य की तैयारियों को प्रभावित कर रही है बल्कि लोगों की सुरक्षा पर भी गंभीर खतरा है।

थनेश्वर बंजारे
Author: थनेश्वर बंजारे

Dist :- Gariyaband Phone No. :- 7067148964 Gmail :- Banjarethaneshwar544@gmail.com

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