उड़ीसा का धान जिले में बड़े स्तर पर डंप… प्रशासन की कार्रवाई ठप, सवालों के घेरे में अधिकारी

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गरियाबंद/देवभोग-:जिला प्रशासन द्वारा भले ही वर्तमान में उड़ीसा से आने वाले धान पर रोक लगा दी गई है, लेकिन पिछले 15 दिनों में मंडी, राइस मिलों और डामर प्लांट में जमा किए गए उड़ीसा के धान पर अब तक किसी भी प्रकार की कार्रवाई नहीं हो सकी है।सूत्रों के अनुसार, प्रशासन को गुमराह करने के लिए व्यापारी उड़ीसा मंडी टैक्स कटवा कर धान को वैध दिखाने का भी प्रयास कर रहे हैं।चार बड़े ठिकानों पर सैकड़ों क्विंटल धान डंप होने की आशंका जानकारी के मुताबिक जिले के कम से कम 4 स्थानों पर सैकड़ों क्विंटल उड़ीसा का धान जमा किया गया है।सबसे बड़ा खुलासा मुंडागांव स्थित एक राइस मिल व पास के डामर प्लांट में भारी मात्रा में धान संग्रह का हुआ है। इसके अलावा कई गांवों में कुछ किसानों के घरों तक व्यापारी धान पहुंचा चुके हैं, जिसकी जानकारी स्थानीय प्रशासन को भी है।परंतु आश्चर्य की बात यह है कि अब तक किसी ठिकाने पर दबिश नहीं दी गई।प्रशासनिक संरक्षण के आरोप तेज… स्थानीय स्तर पर चर्चा गर्म स्थानिय लोगों के बीच यह चर्चा जोरों पर है कि कुछ बड़े व्यापारियों को स्थानीय अधिकारियों का संरक्षण प्राप्त है।

 

चौक-चौराहों से लेकर प्रशासनिक गलियारों तक यह सवाल गूंज रहा है कि —

“जब सबको पता है धान कहां रखा है, फिर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं?”

 

जिले में उत्पादन क्षमता कम, फिर भी बाजार में धान की बाढ़… बड़ा सवाल

देवभोग ब्लॉक के अधिकांश क्षेत्रों में प्रति एकड़ औसत उत्पादन 15 से 17 क्विंटल माना जाता है।

 

इसके बावजूद बड़े पैमाने पर धान किसानों और व्यापारियों के पास उपलब्ध है, जिससे साफ संकेत मिलता है कि —

उड़ीसा से धान लाकर बिचौलियों के माध्यम से यहां बेचा जा रहा है।

 

बताया जाता है कि बिचौलिए उड़ीसा से 2000 से 2200 रुपए प्रति क्विंटल धान खरीदकर उसे यहां किसानों के नाम पर उपार्जन केंद्रों में खपाते हैं।

 

राइस मिलों में भौतिक सत्यापन की मांग तेज

विश्वसनीय सूत्रों का दावा है कि ब्लॉक की कई राइस मिलों द्वारा

जितना धान उठाया गया

उसके अनुरूप नान व SBI को चावल जमा नहीं किया गया

और

न ही उनके पास उतना चावल उपलब्ध है।

 

ऐसे में आशंका बढ़ती है कि मिलों में रखे उड़ीसा के धान को उठाव किए गए धान के रूप में दिखाया जा रहा है।

 

इसी वजह से डी.ओ. कटौती, धान उठाव, चावल जमा और वर्तमान स्टॉक सहित सभी बिंदुओं पर कड़े भौतिक सत्यापन की जरूरत बताई जा रही है।

 

स्थानीय संगठनों ने विभागीय मंत्री को शिकायत कर जांच की मांग भी उठाई है।

 

 

जिले में उड़ीसा धान का बड़ा खेल चल रहा है, यह लगभग स्पष्ट दिख रहा है।

अब सवाल यही है —

 

क्या जिला प्रशासन पूरी कमान संभालते हुए कड़ी कार्रवाई करेगा?या यह मामला भी संरक्षण की परतों में दब जाएगा?

थनेश्वर बंजारे
Author: थनेश्वर बंजारे

Dist :- Gariyaband Phone No. :- 7067148964 Gmail :- Banjarethaneshwar544@gmail.com

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