विवाह के लिए बालिका की आयु 18 वर्ष, बालक की 21 वर्ष अनिवार्य
गरियाबंद-: बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान के तहत कलेक्टर बी.एस. उइके की अध्यक्षता में जिला कार्यालय सभाकक्ष में एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई।
कलेक्टर उइके ने बाल विवाह को समाज के लिए गंभीर चुनौती बताते हुए कहा कि यह प्रथा बच्चों के मानसिक-शारीरिक विकास और उनके भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालती है।
उन्होंने सभी विभागों को मिलकर जमीनी स्तर पर निगरानी मजबूत करने, सतत जनजागरूकता अभियान चलाने और बाल विवाह की सूचना मिलने पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
कलेक्टर ने बताया कि ग्राम स्तर पर निगरानी टीमों का पुनर्गठन किया जाएगा और हर पंचायत में विवाह पूर्व आयु सत्यापन—आधार कार्ड व अंकसूची से—अनिवार्य किया जाएगा।
उन्होंने सभी उपस्थित लोगों से बाल विवाह न करने-न कराने की शपथ दिलाई तथा ‘खबरदार’ पोस्टर का विमोचन किया। इस दौरान डीएसपी निशा सिन्हा भी मौजूद रहीं।
जिला कार्यक्रम अधिकारी अशोक पांडेय ने कहा कि कम उम्र में विवाह और गर्भधारण से मातृ मृत्यु दर, एनीमिया व मानसिक तनाव जैसी समस्याएँ बढ़ती हैं। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता अभियान, माता-पिता परामर्श, तथा सूचना देने वालों की गोपनीयता सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
कार्यशाला में बताया गया कि बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के अनुसार बालिका की आयु 18 वर्ष और बालक की 21 वर्ष से कम होने पर विवाह कराना अपराध है, जिसके लिए दो वर्ष तक की कठोर कारावास या एक लाख रुपये जुर्माना का प्रावधान है।
बाल विवाह की आशंका होने पर हेल्पलाइन 181, 1098 या डायल 100 पर तुरंत सूचना देने की अपील की गई।
जिले के 2 नगरीय निकाय और 195 ग्राम पंचायतों को बाल विवाह मुक्त होने का प्रमाणपत्र भी प्रदान किया गया। कार्यक्रम में पुलिस, महिला एवं बाल विकास विभाग, सीडब्ल्यूसी, सामाजिक संगठन, जनप्रतिनिधि, टेंट-होटल संचालक, ब्यूटी पार्लर संचालक, धर्मगुरु, मीडिया सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित
Author: थनेश्वर बंजारे
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