कनिष्ठ अधिकारियों को जिला शिक्षा अधिकारी बनाए जाने पर उठे सवाल, न्यायालय के फैसलों से बढ़ी शिक्षा विभाग की मुश्किलें
गरियाबंद। जिले का शिक्षा विभाग इन दिनों लगातार विवादों के केंद्र में है। एक ओर जिला शिक्षा अधिकारी पर अटैचमेंट को लेकर भाई-भतीजावाद के आरोप लग रहे हैं, वहीं अब जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) की पदस्थापना को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। प्रदेशभर के वरिष्ठ प्राचार्यों ने कनिष्ठ अधिकारियों को डीईओ बनाए जाने के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और इस व्यवस्था को न्यायालय में चुनौती दी है।
जानकारी के अनुसार, राज्य शासन ने प्रदेश के कई जिलों में जिला शिक्षा अधिकारियों की नियुक्ति ऐसे अधिकारियों को दी है जो वरिष्ठता सूची में काफी पीछे हैं। इनमें वर्ष 2025 में पदोन्नत हुए व्याख्याता, प्रधान पाठक और कनिष्ठ प्राचार्य भी शामिल हैं। इन नियुक्तियों को लेकर वरिष्ठ प्राचार्यों का कहना है कि शासन ने निर्धारित नियमों और वरिष्ठता के सिद्धांतों की अनदेखी की है।
इसी मुद्दे को लेकर हाल ही में स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा प्राचार्य एलबी रामेश्वर जायसवाल को बिलासपुर जिले का प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी बनाए जाने के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। प्राचार्य राघवेंद्र गौराहा और कामेश्वर बैरागी ने याचिका दायर कर कहा कि उनसे कई वर्षों जूनियर अधिकारी को डीईओ बनाकर वरिष्ठता के अधिकारों का उल्लंघन किया गया है।
याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता जितेंद्र पाली ने न्यायालय में राज्य सरकार के प्रचलित परिपत्र का हवाला देते हुए दलील दी कि विभाग ने नियमों और निर्धारित मापदंडों की अनदेखी की है। उन्होंने बताया कि बिलासपुर जिले में 100 से अधिक ऐसे प्राचार्य हैं जो नियुक्त अधिकारी से लगभग 18 वर्ष याn उससे अधिक वरिष्ठ हैं। इसके बावजूद केवल छह माह पूर्व शिक्षक एलबी से प्राचार्य पद पर पदोन्नत हुए अधिकारी को प्रभारी डीईओ का दायित्व सौंप दिया गया।
याचिका में यह भी तर्क दिया गया कि शासन के परिपत्र के अनुसार कोई कनिष्ठ अधिकारी अपने वरिष्ठ अधिकारी की गोपनीय चरित्रावली (सीआर) नहीं लिख सकता। ऐसे में वरिष्ठ अधिकारियों के ऊपर कनिष्ठ अधिकारी की नियुक्ति नियमों के विपरीत है।
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने बिलासपुर के प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी की पदस्थापना पर हस्तक्षेप करते हुए उन्हें पद से हटा दिया। इसी प्रकार का आदेश बलौदाबाजार के वर्तमान जिला शिक्षा अधिकारी के मामले में भी सामने आया है, जिससे शिक्षा विभाग में हलचल तेज हो गई है।
अब गरियाबंद सहित अन्य जिलों में की गई जिला शिक्षा अधिकारियों की नियुक्तियों पर भी सवाल उठने लगे हैं। वरिष्ठ प्राचार्यों का मानना है कि यदि नियुक्तियां नियमों और वरिष्ठता के अनुरूप नहीं हुईं, तो ऐसे मामलों में न्यायालय का रुख किया जाएगा।
फिलहाल गरियाबंद जिले में वर्तमान जिला शिक्षा अधिकारी की पदस्थापना कितने समय तक बरकरार रहेगी, यह आने वाले दिनों में उच्च न्यायालय के आदेश पर निर्भर करेगा। शिक्षा विभाग में चल रहे इन विवादों ने शासन की नियुक्ति प्रक्रिया पर भी कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
Author: थनेश्वर बंजारे
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