क्या टीके की गुणवत्ता, स्टोरेज प्रक्रिया में चूक तो नही
महासमुंद/बागबाहरा-:बागबाहरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में 5 वर्षीय बालक की टीकाकरण के कुछ
घंटों बाद हुई संदिग्ध मौत ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। परिजनों ने सीधे तौर पर लापरवाही का आरोप लगाया है, वहीं पूरे मामले ने इलाके में हड़कंप मचा दिया है।
जानकारी के अनुसार, महासमुंद निवासी नरेंद्र यादव अपने पुत्र नैतिक यादव को नियमित टीकाकरण के लिए स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे थे। आरोप है कि डीपीटी टीका लगाने से पहले बच्चे की स्वास्थ्य स्थिति की सही जांच नहीं की गई। टीका लगने के बाद भी बच्चे को कुछ समय तक निगरानी में रखने के बजाय तुरंत घर भेज दिया गया।
परिजनों का कहना है कि टीका लगने के कुछ ही घंटों बाद बच्चे की तबीयत तेजी से बिगड़ने लगी, उसे सांस लेने में दिक्कत होने लगी। ऐसे हालात में प्राथमिक उपचार या आपातकालीन सुविधा उपलब्ध नहीं कराई गई, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई।
लापरवाही के प्रमुख बिंदु:
टीकाकरण से पहले बच्चे की स्वास्थ्य जांच (स्क्रीनिंग) ठीक से नहीं की गई
टीका लगाने के बाद आवश्यक ऑब्जर्वेशन (निगरानी) में नहीं रखा गया
आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध नहीं कराई गई
परिजनों को संभावित साइड इफेक्ट की स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई
घटना के बाद परिजनों ने स्वास्थ्य केंद्र पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने यह भी कहा है कि बच्चे का पोस्टमार्टम बाहरी विशेषज्ञ टीम से कराया जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि लगाया गया टीका सुरक्षित और सही था या नहीं।
वहीं, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने मामले में जांच शुरू होने की बात कही है। उनका कहना है कि टीकाकरण प्रोटोकॉल का पालन किया गया या नहीं, इसकी विस्तृत जांच की जा रही है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि कहीं टीके की गुणवत्ता, स्टोरेज या प्रक्रिया में कोई चूक तो नहीं हुई।
इस घटना के बाद क्षेत्र में लोगों के बीच डर और आक्रोश का माहौल है, और स्वास्थ्य सेवाओं की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
Author: थनेश्वर बंजारे
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