गरियाबंद-:आदिवासी बहुल इलाकों के बच्चों के पोषण और शिक्षा-सहायता के लिए प्रधानमंत्री जनमन (Tribal Area Development) योजना के तहत गरियाबंद जिले में कुल 9 नई आंगनबाड़ी भवनों का निर्माण स्वीकृत किया गया था।
इनमें—
मैनपुर ब्लॉक – 6 भवन
गरियाबंद ब्लॉक – 2 भवन
छुरा ब्लॉक – 1 भवन

स्वीकृति के बावजूद जिले में एक भी भवन का निर्माण जमीन पर शुरू नहीं हुआ है। पोर्टल और फाइलों में “कार्य पूर्ण” या “कार्य प्रगति पर” दिखाया जा रहा है, जबकि हकीकत में कुछ और है।
मैनपुर की 6 आंगनबाड़ियाँ—फाइलों में कंस्ट्रक्शन, जमीन पर सुनसान

मैनपुर ब्लॉक के जिन गांवों में भवन बनने थे, वे हैं—
तुहामेटा पंचायत – भालूचुआ
खरीपथरा पंचायत – कोतराडोंगरी
सालेभाठा पंचायत – खसरेपारा बनवापारा
गोलामाल पंचायत – गोलामाल सिंहनापारा
छोटे गोबरा पंचायत – छोटे गोबरा
कुहीमाल पंचायत – कुहीमाल
ग्रामीणों का कहना है—
कहीं सिर्फ गिट्टी डालकर काम रोक दिया गया

कुछ जगहों पर छड़ पटकी गई लेकिन महीनों से काम बंद
कई स्थलों पर तो एक ईंट भी नहीं रखी गई खरीपथरा पंचायत के कोतराडोंगरी गांव में ग्रामीणों ने बताया—
“काम बंद हुए लगभग 8–9 महीने हो गए। शुरुआत में थोड़ी गिट्टी-छड़ डाली गई, पर उसके बाद से न ठेकेदार दिखाई दिया, न काम। पता नहीं ठेकेदार कौन है, लेकिन कागजों में पूरा दिखा दिया गया है।”

गरियाबंद ब्लॉक में दो आंगनबाड़ियाँ—जमीन पर काम शुरू ही नहीं हुआ
बेहराबुड़ा पंचायत – भेजराडीह उपरपारा
जोबा पंचायत – उरतुली नवापारा
दोनों जगहों पर न मशीनरी है, न श्रमिक, न सामग्री। इसके बावजूद पोर्टल में “निर्माण कार्य जारी” बताया जा रहा है। ग्रामीण इसे स्पष्ट धोखाधड़ी बता रहे हैं।
छुरा ब्लॉक—कोकड़ाछेड़ा में सबसे बदतर हालत
भरवामुड़ा पंचायत – कोकड़ाछेड़ा में तो स्थिति बेहद चिंताजनक है। नए भवन का काम शुरू नहीं हुआ, उलटे—
एक ही जर्जर कमरे को दो हिस्सों में बांटकर आधा हिस्सा आंगनबाड़ी,
और आधा हिस्सा स्कूल की कक्षाओं के लिए उपयोग किया जा रहा है।
एक स्थानीय शिक्षक ने कहा—
“पांच क्लास और आंगनबाड़ी को एक ही कमरे में चलाना बच्चों की शिक्षा और सुरक्षा दोनों के लिए खतरा है।
प्रशासनिक निगरानी शून्य —
ठेकेदारों की मनमानी चरम पर
तीनों ब्लॉकों की साइटों पर—
न इंजीनियरों की विज़िट,
न विभागीय मॉनिटरिंग,
न प्रगति का कोई रिकॉर्ड।
इसके बावजूद कागजों में निर्माण को पूरा या गतिमान दर्शाया गया है। इससे ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ रहा है।
अब रायपुर तक जांच की मांग — जनप्रतिनिधि बोले, “धरना देना पड़े तो भी देंगे
लगातार देरी और कथित अनियमितताओं के बाद अब ग्रामीण, सामाजिक संगठन और जनप्रतिनिधि एकजुट हो गए हैं। उनका कहना है—
यदि जिला प्रशासन कार्रवाई नहीं करता,
ठेकेदारों पर जवाबदेही तय नहीं होती,और वास्तविक स्थिति सार्वजनिक नहीं होती,
तो पूरा मामला रायपुर तक ले जाया जाएगा।
एक जनप्रतिनिधि ने तीखे शब्दों में कहा—
“प्रधानमंत्री जनमन योजना आदिवासी क्षेत्रों के लिए बनी है। इसमें भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं।
जरूरत पड़ी तो गरियाबंद से रायपुर तक धरना, प्रदर्शन और शिकायत दर्ज कराएंगे।”
जनपद प्रतिनिधियों की चेतावनी
जनपद स्तर पर भी नाराजगी बढ़ गई है। प्रतिनिधियों ने बयान जारी करते हुए कहा—
“अगर जिला प्रशासन चुप बैठा रहा तो हम रायपुर जाकर जांच की मांग करेंगे।
बच्चों का भविष्य फाइलों में नहीं, जमीन पर सुरक्षित होना चाहिए।”
क्या फाइलों में बनी इमारतें कभी जमीन पर खड़ी होंगी?
ग्रामीणों का बड़ा सवाल—
कब होगी ठेकेदारों पर कार्रवाई?
कब होगी निष्पक्ष जांच?
कब बनेगी आंगनबाड़ी की असली इमारत?
जब तक—विभागीय निगरानी मजबूत नहीं होगी,
प्रशासन पारदर्शिता नहीं अपनाएगा,
और ठेकेदारों पर जवाबदेही नहीं तय होगी,
तब तक आदिवासी बच्चों के लिए स्वीकृत ये भवन कागजों की कहानी बने रहेंगे।
ग्रामीणों की दर्दभरी पुकार आज भी यही है—
“कागजों की आंगनबाड़ी कब बनेगी हमारे बच्चों की असली इमारत?”
Author: थनेश्वर बंजारे
Dist :- Gariyaband Phone No. :- 7067148964 Gmail :- Banjarethaneshwar544@gmail.com




