सिकासेर बांध में रबी पानी रोकने पर संग्राम: करोड़ों खर्च के बावजूद 14–15 साल मरम्मत न होने का दावा संदेहों के घेरे में-:इंद्रजीत महाडिक

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गरियाबंद /फिंगेश्वर-:सिकासेर बांध से रबी सीजन में पानी न देने के जल संसाधन विभाग के फैसले ने क्षेत्र में भारी विवाद खड़ा कर दिया है। विभाग ने नहरों की मरम्मत, सिल्ट सफाई, स्टाप लॉक सुधार, कुलापा गेट और लाइनिंग दुरुस्ती को कारण बताते हुए इस वर्ष रबी हेतु पानी बंद करने का निर्णय लिया है। लेकिन जिला पंचायत सदस्य इन्द्रजीत महाड़िक ने विभाग के तर्क को भ्रामक बताते हुए करोड़ों रुपए के खर्च पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

महाड़िक ने बताया कि विभाग यह दावा कर रहा है कि पिछले 14–15 वर्षों से नहरों की मरम्मत नहीं हुई, जबकि खुद जल संसाधन विभाग की ओर से वर्ष 2020-21 से 2024-25 तक हर वर्ष करोड़ों रुपये नहर मरम्मत और गेट सुधार कार्यों पर खर्च किए जाने की जानकारी जिला पंचायत की बैठक में प्रस्तुत की गई है।

पांच वर्षों में करीब 11 करोड़ रुपए खर्च — फिर मरम्मत कहाँ?

2020-21 : ₹164.90 लाख

2021-22 : ₹164.31 लाख

2022-23 : ₹228.90 लाख

2023-24 : ₹258.50 लाख

2024-25 : ₹238.79 लाख

इन मदों में गेट मरम्मत, कुलापा फिक्सिंग, बंडीग, जल प्रवाह सुधार एवं लाइनिंग कार्य शामिल बताए गए हैं। ऐसे में यह दावा कि 14-15 वर्षों से कोई मरम्मत नहीं हुई — तथ्यों के बिल्कुल विपरीत प्रतीत होता है।

महाड़िक ने कहा कि दो वर्ष पूर्व कांग्रेस सरकार के दौरान भी इसी कारण का हवाला देकर किसानों को लगातार 2-3 वर्षों तक रबी पानी से वंचित रखा गया था। अब इसी प्रक्रिया को दोहराकर फिर से करोड़ों के नए काम स्वीकृत कराने की तैयारी भ्रष्टाचार का संकेत देती है।

किसान नाराज़ — उच्च स्तरीय जांच की मांग

स्थानीय कृषक लंबे समय से नहरों में महज औपचारिक मरम्मत होने की शिकायत करते रहे हैं। करोड़ों की राशि खर्च होने के बावजूद नहरों की वास्तविक स्थिति जस की तस होने पर अब किसानों में आक्रोश बढ़ गया है।

महाड़िक ने मांग की है कि सिकासेर बांध सहित सभी नहरों में किए गए रखरखाव एवं मरम्मत कार्यों की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए, ताकि भ्रष्टाचार और अनियमितताओं की सच्चाई सामने आएगी

थनेश्वर बंजारे
Author: थनेश्वर बंजारे

Dist :- Gariyaband Phone No. :- 7067148964 Gmail :- Banjarethaneshwar544@gmail.com

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