भेदभाव का लगाया आरोप
गरियाबंद-:गरियाबंद जिला पंचायत के निर्वाचित सदस्यों ने 15वें वित्त आयोग से प्राप्त राशि के मनमाने एवं पक्षपातपूर्ण बंटवारे पर गंभीर आपत्ति जताई है। इस संबंध में जिला पंचायत सदस्यों इंद्रजीत महाडिक (क्षेत्र क्रमांक–03), संजय कुमार (क्षेत्र क्रमांक–07) एवं लोकेश्वर नेताम (क्षेत्र क्रमांक–08) ने संयुक्त रूप से जिला कलेक्टर गरियाबंद को ज्ञापन सौंपा है
सदस्यों का कहना है कि जिला पंचायत द्वारा निधि का वितरण शासन की गाइडलाइन और संवैधानिक प्रावधानों के विपरीत किया गया है। उनके अनुसार, कुछ क्षेत्रों में विकास कार्यों के लिए बड़ी राशि स्वीकृत की गई जबकि अन्य क्षेत्रों को जानबूझकर वंचित रखा गया, जो न केवल असमानता का उदाहरण है बल्कि प्राकृतिक न्याय (Natural Justice) की भावना के भी खिलाफ है।
*सदस्यों का आरोप*
“हमारे क्षेत्रों के प्रस्तावों की अनदेखी”
जिला पंचायत सदस्यों ने बताया कि उनके क्षेत्रों से पूर्व में प्रस्तुत कई विकास कार्य योजनाओं को नज़रअंदाज़ कर दिया गया, जबकि कुछ विशेष क्षेत्रों को अत्यधिक धनराशि आवंटित की गई है।
उन्होंने कहा कि यह कृत्य 15वें वित्त आयोग की गाइडलाइन (अनुच्छेद 4.1 एवं 5.2) का स्पष्ट उल्लंघन है, जिसमें निधि के उपयोग में समानता, पारदर्शिता और आवश्यकता आधारित प्राथमिकता का उल्लेख है।
*ज्ञापन में उठाए गए मुख्य बिंदु*
15वें वित्त आयोग की निधि का वितरण पारदर्शी प्रक्रिया और निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं किया गया।
पिछड़े ब्लॉकों को प्राथमिकता देने की शासन की नीति का उल्लंघन हुआ।
निधि वितरण से संबंधित दस्तावेज, बैठक कार्यवृत्त और अनुमोदन आदेश पारदर्शी ढंग से सार्वजनिक नहीं किए गए।
पूर्व में प्रस्तुत परियोजनाओं का परीक्षण किए बिना मनमाने तरीके से राशि स्वीकृत की गई।
*सदस्यों की तीन प्रमुख मांगें*
15वें वित्त आयोग की राशि का पुनर्वितरण न्यायसंगत और गाइडलाइन के अनुरूप किया जाए।
संपूर्ण प्रक्रिया, अनुमोदन आदेश एवं संबंधित फाइलों की प्रतिलिपि सदस्यों को उपलब्ध कराई जाए।
जब तक जांच पूरी न हो, विवादित कार्ययोजनाओं पर तत्काल रोक लगाई जाए।
*संवैधानिक एवं विधिक आधार*
सदस्यों ने अपने ज्ञापन में संविधान के अनुच्छेद 14, 243G-H और पंचायत राज अधिनियम की धारा 47-48 का उल्लेख करते हुए कहा कि निधि वितरण में समानता, पारदर्शिता और न्याय के सिद्धांतों का पालन नहीं किया गया है।
उन्होंने इसे शासन की नीति भावना के विपरीत बताया और मांग की कि संवैधानिक प्रावधानों एवं प्राकृतिक न्याय के आधार पर निर्णय लेकर निधि का पुनर्वितरण किया जाए।
*सदस्यों ने दी चेतावनी*
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि यदि मामले की निष्पक्ष जांच नहीं होती, तो वे इस विषय को राज्य आयुक्त रायपुर संभाग, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, तथा आवश्यक होने पर माननीय न्यायालय तक ले जाने को बाध्य होंगे।
Author: थनेश्वर बंजारे
Dist :- Gariyaband Phone No. :- 7067148964 Gmail :- Banjarethaneshwar544@gmail.com




