पक्के निर्माण से प्रशासन की कार्यवाही पर उठे सवाल
नगर पंचायत का नोटिस बना मज़ाक – जनता में आक्रोश
गरियाबंद/राजिम – धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान रखने वाली धर्म नगरी राजिम में करोड़ों रुपये की सरकारी जमीन पर खुलेआम कब्जा और निर्माण कार्य जारी है। पौनी पसारी इलाके में राष्ट्रीय राजमार्ग से सटी इस बहुमूल्य भूमि पर अतिक्रमणकारियों ने पक्के मकान और ढांचे खड़े कर लिए हैं। यह सब नगर पंचायत राजिम और जिम्मेदार विभागों की आंखों के सामने हो रहा है।स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि शिकायतें देने के बावजूद विभाग ने केवल नोटिस जारी कर खानापूर्ति की है। जबकि हकीकत यह है कि अवैध निर्माण की रफ्तार पर कोई रोक नहीं लगाई गई। लोगों का कहना है कि करोड़ों की सरकारी जमीन पर कब्जे की यह घटना शासन-प्रशासन की निष्क्रियता और मिलीभगत को उजागर करती है।निवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही अतिक्रमणकारियों पर कड़ी कार्रवाई नहीं हुई और सरकारी भूमि को मुक्त नहीं कराया गया, तो वे कलेक्टर और विधायक कार्यालय के बाहर उग्र आंदोलन करने बाध्य होंगे।
करोड़ों की संपत्ति पर भू-माफियाओं की नजर
राष्ट्रीय राजमार्ग से सटी यह जमीन विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। यही वजह है कि इसकी बाजार कीमत करोड़ों रुपये आंकी जाती है। क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि भू-माफियाओं ने प्रशासन की ढिलाई का फायदा उठाकर कब्जा जमाया है। यह केवल अवैध निर्माण नहीं, बल्कि सरकारी संपत्ति का खुला दुरुपयोग और नुकसान है।
नगर पंचायत की भूमिका संदिग्ध
नगर पंचायत राजिम के जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को मामले की जानकारी पहले ही दी जा चुकी थी। लेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल नोटिस चिपका दिए गए, जिससे अतिक्रमणकारियों के हौसले और बुलंद हो गए। लोगों का कहना है कि नगर पंचायत की यह ‘नोटिस राजनीति’ सरकारी संपत्ति को बचाने के बजाय अतिक्रमण को बढ़ावा देने वाली साबित हो रही है।
जनता में उबाल, जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग
पौनी पसारी इलाके के नागरिक अब लामबंद हो रहे हैं। उन्होंने साफ कहा है कि प्रशासन यदि निष्क्रिय रहा तो यह आंदोलन जिले भर में फैल सकता है। जनता की मांग है कि तत्काल अतिक्रमण हटाया जाए, कब्जा करने वालों पर आपराधिक प्रकरण दर्ज हो और नगर पंचायत की लापरवाही की उच्च स्तरीय जांच हो।
Author: थनेश्वर बंजारे
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