कस्टोडियल डेथ पर न्याय का ऐतिहासिक प्रहार: सथानकुलम केस में 9 पुलिसकर्मियों को फांसी, कोर्ट ने कहा—‘यह रेयरेस्ट ऑफ रेयर’

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जब रक्षक ही बन गए भक्षक

तमिलनाडु (Tamil Nadu) | थूथुकुडी/मदुरै | विशेष रिपोर्ट भारतीय न्यायपालिका ने पुलिस बर्बरता के खिलाफ एक सख्त और ऐतिहासिक संदेश देते हुए सथानकुलम कस्टोडियल डेथ मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। मदुरै की विशेष अदालत ने जून 2020 में हिरासत में हुई पिता-पुत्र की मौत के मामले में दोषी पाए गए 9 पुलिसकर्मियों को मृत्युदंड (फांसी) की सजा सुनाई है।
यह फैसला Sathankulam Custodial Death Case में एक अहम मील का पत्थर माना जा रहा है, जिसने पूरे देश को झकझोर दिया था।

जब रक्षक ही बन गए भक्षक
जून 2020 में कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान Thoothukudi जिले के Sathankulam में मोबाइल दुकान चलाने वाले पी. जयराज (58) और उनके बेटे जे. बेनिक्स (31) को कथित तौर पर दुकान देर तक खुली रखने के आरोप में पुलिस ने हिरासत में लिया था।
लेकिन हिरासत में उनके साथ जो हुआ, उसने पूरे देश की आत्मा को झकझोर दिया। आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने दोनों को रातभर बेरहमी से पीटा, जिससे गंभीर चोटें और आंतरिक रक्तस्राव हुआ। इलाज के दौरान 22 और 23 जून को दोनों की मौत हो गई।

कोर्ट की सख्त टिप्पणी: ‘मानवाधिकारों का चीरहरण’
अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश जी. मुथुकुमारन ने इस मामले को ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ बताते हुए कहा—
“जिन्हें कानून की रक्षा करनी थी, उन्हीं ने कानून तोड़ा। यह सिर्फ हत्या नहीं, बल्कि मानवाधिकारों और खाकी की गरिमा का चीरहरण है।”
कोर्ट ने सभी 9 दोषी पुलिसकर्मियों को फांसी की सजा सुनाई और ₹1.40 करोड़ का जुर्माना भी लगाया, जिसे पीड़ित परिवार को दिया जाएगा।

जांच में आए निर्णायक मोड़
इस मामले में सच्चाई सामने लाने में कई अहम पहलुओं ने भूमिका निभाई—
सीबीआई जांच: Central Bureau of Investigation ने साबित किया कि पुलिस की FIR फर्जी थी और कोई लॉकडाउन उल्लंघन नहीं हुआ था।
महिला कांस्टेबल की गवाही: थाने की ही एक महिला हेड कांस्टेबल ने कोर्ट में सच्चाई उजागर कर दी।
फोरेंसिक सबूत: खून के धब्बे पीड़ितों के डीएनए से मेल खा गए, जिससे पुलिस का ‘प्राकृतिक मौत’ का दावा खारिज हो गया।

परिवार को न्याय, व्यवस्था को चेतावनी
पीड़ित परिवार की ओर से सेल्वा रानी ने फैसले का स्वागत करते हुए कहा—
“आज मेरे पति और बेटे की आत्मा को शांति मिली है। यह सिर्फ हमारी नहीं, हर पीड़ित की लड़ाई थी।”
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला पुलिस अत्याचार के खिलाफ एक मजबूत नजीर बनेगा। हालांकि, दोषियों के पास उच्च न्यायालय में अपील का विकल्प अभी भी मौजूद है।

निष्कर्ष
सथानकुलम कस्टोडियल डेथ केस का यह फैसला सिर्फ एक परिवार के लिए न्याय नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम के लिए एक चेतावनी है—
कानून के रक्षक अगर भक्षक बनेंगे, तो न्यायपालिका उन्हें बख्शेगी नहीं।

थनेश्वर बंजारे
Author: थनेश्वर बंजारे

Dist :- Gariyaband Phone No. :- 7067148964 Gmail :- Banjarethaneshwar544@gmail.com

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