प्रदेश में डबल इंजन की सरकार और बना सकते हैं कृषि महाविद्यालय जनता को गुमराह कर रही सरकार -भूपेश बघेल
गरियाबंद-:राजिम विधानसभा क्षेत्र में प्रस्तावित कृषि महाविद्यालय के भवन निर्माण को लेकर राजनीतिक माहौल लगातार गरमाता जा रहा है। महाविद्यालय कहां बनेगा, इसे लेकर तीन अलग-अलग स्थानों पर दावेदारी सामने आने से मामला उलझ गया है। स्थिति ऐसी बन गई है कि बार-बार विरोध, ज्ञापन और आंदोलन के कारण अब तक कृषि महाविद्यालय के स्थायी भवन का निर्माण शुरू ही नहीं हो पाया है, जिससे सरकार और जिला प्रशासन दोनों के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।
जानकारी के अनुसार राजिम विधानसभा क्षेत्र में कृषि महाविद्यालय के लिए सबसे पहले पोखरा में लगभग 75 एकड़ जमीन चिन्हांकित की गई थी। इस क्षेत्र में पहले से कृषि एवं उद्यानिकी विभाग का बागान और बीज उत्पादन केंद्र भी संचालित है, इसलिए स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि कृषि से जुड़ी सभी सुविधाएं पहले से मौजूद होने के कारण महाविद्यालय यहीं बनाया जाना चाहिए।
इसके बाद कांग्रेस शासनकाल में छत्तीसगढ़ के संत पवन दीवान के गृह ग्राम किरवई में आयोजित कार्यक्रम के दौरान तत्कालीन कृषि मंत्री रविंद्र चौबे ने कृषि महाविद्यालय की घोषणा की थी। उस समय किरवई में भी जमीन चिन्हांकन की प्रक्रिया शुरू हुई, जिसके बाद वहां के ग्रामीण भी लगातार मांग कर रहे हैं कि महाविद्यालय उनके गांव में ही स्थापित किया जाए।
वहीं वर्तमान स्थिति यह है कि राजिम विधानसभा के फिंगेश्वर ब्लॉक में पिछले कई वर्षों से कृषि महाविद्यालय किराए के भवन में संचालित हो रहा है। इसी को आधार बनाकर फिंगेश्वर नगर विकास समिति और स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जब महाविद्यालय पहले से फिंगेश्वर में संचालित है, तो उसका स्थायी भवन भी फिंगेश्वर में ही बनाया जाना चाहिए।
इसी मांग को लेकर फिंगेश्वर के नागरिक कई बार चक्का जाम, धरना-प्रदर्शन और एसडीएम तथा कलेक्टर को ज्ञापन सौंप चुके हैं। दूसरी ओर पोखरा पंचायत सहित आसपास की करीब दस ग्राम पंचायतों के ग्रामीणों ने भी प्रशासन को ज्ञापन देकर महाविद्यालय अपने क्षेत्र में बनाने की मांग की है।
वहीं किरवई के ग्रामीण भी लगातार अपनी मांग को लेकर प्रशासनिक अधिकारियों के पास पहुंच रहे हैं।
हाल ही में किरवई में कृषि महाविद्यालय के लिए भूमि पूजन का कार्यक्रम तय किया गया था, जिसमें कृषि मंत्री रामविचार नेताम और क्षेत्रीय विधायक की मौजूदगी में भूमि पूजन होना प्रस्तावित था।
लेकिन स्थानीय स्तर पर विरोध और आपत्ति के चलते यह कार्यक्रम अंतिम समय में रोक दिया गया, जिससे पूरा मामला फिर से अधर में लटक गया।
इसी बीच क्षेत्र में आयोजित एक सामाजिक कार्यक्रम के दौरान पहुंचे प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी इस मुद्दे पर तंज कसते हुए कहा कि जब सरकार आपकी है, विधायक आपकी है और डबल इंजन की सरकार चल रही है, तो एक ही नहीं बल्कि दो कृषि महाविद्यालय भी बनाए जा सकते हैं।
उन्होंने कहा कि यदि वर्षों से फिंगेश्वर में महाविद्यालय संचालित हो रहा है, तो वहां स्थायी भवन बनाने में आखिर दिक्कत क्या है।
राजनीतिक बयानबाजी और स्थानीय स्तर पर बढ़ते विरोध के कारण फिलहाल कृषि महाविद्यालय का निर्माण पूरी तरह रुका हुआ है। तीन अलग-अलग स्थानों की मांग के चलते सरकार और जिला प्रशासन के सामने समाधान निकालना बड़ी चुनौती बन गया है।
अब देखना यह होगा कि शासन और प्रशासन इस विवाद का समाधान कैसे निकालते हैं। यदि जल्द निर्णय नहीं लिया गया, तो राजिम विधानसभा में कृषि महाविद्यालय का मुद्दा आने वाले समय में और बड़ा जनआंदोलन का रूप ले सकता है, जिसका सीधा असर क्षेत्र की राजनीति और विकास कार्यों पर पड़ना तय माना जा रहा है।
Author: थनेश्वर बंजारे
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