कुंडेलभांठा धान संग्रहण केंद्र में 24 करोड़ का गड़बड़ घोटाला!

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4.17% सुखत ने खड़े किए सवाल, पूर्व डीएमओ की लापरवाही पर घिरी व्यवस्था

गरियाबंद-: जिले के फिंगेश्वर विकासखंड स्थित कुंडेलभांठा धान संग्रहण केंद्र में खरीफ सीजन 2024–25 के दौरान धान में 4.17 प्रतिशत सुखत (कमी) दिखाए जाने का मामला अब बड़ा घोटाला बनकर सामने आ रहा है। करीब 24 से 26 करोड़ रुपये के धान की कमी ने पूरे मामले को गंभीर बना दिया है और विभागीय कार्यप्रणाली के साथ-साथ पूर्व अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।मिली जानकारी के अनुसार खरीफ सीजन 2024–25 में कुंडेलभांठा धान संग्रहण केंद्र में कुल 21,34,696.61 क्विंटल धान की खरीदी की गई थी, जिसे 54,60,100 बोरियों में संग्रहित किया गया। इसके बाद कस्टम मिलिंग के लिए 20,45,397.92 क्विंटल धान मिलों को भेजा गया। विभागीय आंकड़ों के अनुसार कुल धान का 4.17 प्रतिशत सुखत दर्शाया गया, जिससे लगभग 85,387.86 क्विंटल धान की कमी सामने आई। इस

धान की अनुमानित कीमत 24 से 26 करोड़ रुपये बताई जा रही है।सरकारी मानकों के अनुसार सामान्य परिस्थितियों में लगभग 2 प्रतिशत तक सुखत को स्वीकार्य माना जाता है, लेकिन यहां 4.17 प्रतिशत सुखत दिखाए जाने से पूरे मामले में अनियमितता की आशंका गहरा गई है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतनी बड़ी मात्रा में धान की कमी सामने आने के बावजूद लंबे समय तक इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।सूत्रों के अनुसार यह पूरा मामला पूर्व डीएमओ अमित चंद्राकर के कार्यकाल में सामने आया था। आरोप है कि धान खरीदी और संग्रहण के दौरान लापरवाही बरती गई, जिसके चलते करोड़ों रुपये के धान की कमी दर्ज हो गई। वहीं वर्तमान डीएमओ गुलाब राठौर का कहना है कि कुंडेलभांठा केंद्र में 4.17 प्रतिशत सुखत दर्ज किया गया है और पूरे मामले की जांच कराई जा रही है। यदि किसी प्रकार की अनियमितता पाई जाती है तो जिम्मेदारों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के निर्देशों के अनुसार 0.5 प्रतिशत से कम कमी होने पर केंद्र प्रभारी को नोटिस, 1 से 2 प्रतिशत तक कमी होने पर विभागीय जांच और 2 प्रतिशत से अधिक कमी पाए

जाने पर केंद्र प्रभारी को तत्काल निलंबित कर विभागीय जांच और आपराधिक प्रकरण दर्ज करने का प्रावधान है। इसके बावजूद कुंडेलभांठा केंद्र में 4.17 प्रतिशत सुखत सामने आने के बाद भी अब तक कोई कड़ी कार्रवाई नहीं होना सवालों को और गहरा रहा है।मामले के सामने आने के बाद पूर्व संग्रहण केंद्र प्रभारी लकेश तोरकर को पद से हटाकर अन्यत्र अटैच कर दिया गया है। इसे लेकर भी आरोप लग रहे हैं कि पूरे मामले को दबाने के लिए लीपापोती की जा रही है।वहीं क्षेत्रीय पूर्व  मंत्री अमितेश शुक्ल ने भी मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि यदि दोषियों पर कार्रवाई नहीं होती है.उच्च स्तरीय जांच की मांग करेंगे और आवश्यकता पड़ने पर आंदोलन भी किया जाएगा।इधर  ब्लॉक कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष रुपेश साहू ने इस मामले को बड़ा भ्रष्टाचार बताते हुए सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि करोड़ों रुपये के धान की कमी सामने आने के बावजूद दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होना सरकार की मंशा पर सवाल खड़े करता है।इस पूरे मामले ने एक बार फिर धान खरीदी व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि 24 करोड़ रुपये के इस कथित धान घोटाले में जिम्मेदारों पर कब तक कार्रवाई होती है या मामला फाइलों में ही दबकर रह जाता है।

 

थनेश्वर बंजारे
Author: थनेश्वर बंजारे

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