सख्त निर्देश जारी अनुपस्थित कर्मचारियों पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी—बिचौलियों पर निगरानी और किसानों को रकबा समर्पण के लिए प्रोत्साहन
गरियाबंद-:कलेक्टर भगवान सिंह उइके के मार्गदर्शन में आज जिला कार्यालय के सभाकक्ष में धान खरीदी वर्ष 2025-26 के लिए प्रभारी समिति प्रबंधकों और डाटा ऑपरेटरों का प्रशिक्षण आयोजित हुआ। जिलेभर के प्रबंधकों को धान उपार्जन से जुड़ी सभी तकनीकी प्रक्रियाओं, टोकन व्यवस्था, नमी परीक्षण, रजिस्टर संधारण और स्टेकिंग व्यवस्था की बारीक जानकारी दी गई। कलेक्टर उइके ने प्रशिक्षण के दौरान कहा कि धान खरीदी शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है, इसलिए किसी भी प्रकार की अनियमितता को किसी भी स्तर पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट कहा कि धान खरीदी को अत्यावश्यक सेवा (ESMA) में शामिल किया गया है, इसलिए खरीदी में संलग्न कर्मचारी यदि ड्यूटी से अनुपस्थित पाए जाते हैं तो उन पर FIR तक की कार्रवाई होगी। कलेक्टर के मुख्य निर्देश—व्यवस्था को चुस्त-दुरस्त बनाने पर जोर प्रति एकड़ 21 क्विंटल के मान से धान खरीदी सुनिश्चित की जाए। प्रत्येक किसान का टोकन प्रतिदिन सुबह 8 से 9 बजे ‘तुहर हाट’ से तथा 9:30 से शाम 5 बजे तक समिति में काटा जा सकेगा। नमी परीक्षण के बाद ही धान फड़ में प्रवेश पाएगा। शाम 5 बजे के बाद किसी भी परिस्थिति में धान खरीदी नहीं की जाएगी। रिजेक्टेड और अधिक नमी वाला धान उसी दिन 5 बजे तक फड़ से हटाया जाए। बारदाना केवल किसान की उपस्थिति में और टोकन सत्यापन के बाद ही दिया जाए। सभी रजिस्टर—टोकन, धान आवक-जावक, तौल, बारदाना, निरीक्षण—सही रूप में संधारित रहें। कलेक्टर ने यह भी कहा कि धान की स्टेकिंग किस्मवार की जाए, बारदाने पर समिति का नाम और पंजीयन नंबर का स्टेंसिल स्पष्ट रहे। बारिश या आकस्मिक मौसम से बचाव के लिए केंद्रों में प्लास्टिक कैप-कवर, नालियां और भूसा जैसी सुरक्षा व्यवस्था पहले से मौजूद हो। बिचौलियों पर सख्ती—औसत उपज से अधिक लाने वालों की जांच प्रशिक्षण में बताया गया कि कई बार कोचिया और बिचौलिये अन्य किसानों के पंजीयन पर धान खपाने की कोशिश करते हैं। कलेक्टर ने निर्देश दिया: ऐसा पाए जाने पर तत्काल नोडल अधिकारी को सूचना दी जाए। ग्राम औसत से अधिक धान लाने वाले किसानों की तुरंत जांच होगी। यदि धान खरीफ उत्पादन का न होकर अन्यत्र संग्रहित पाया गया, तो खरीदी नहीं होगी। किसानों को रकबा समर्पण के लिए प्रेरित करें कलेक्टर ने यह भी स्पष्ट कहा कि खरीदी के बाद किसान अपने बचत रकबे का समर्पण स्वेच्छा से करें, ताकि खरीदी प्रक्रिया व्यवस्थित और पारदर्शी रहे। इसके लिए सभी प्रबंधकों को किसानों को जागरूक करने कहा गया है।
कर्मचारियों की कमी और अनुपस्थिति—प्रशासन की सख्ती
जिले में कल धान खरीदी केंद्रों में अनुपस्थित पाए गए 27 समिति प्रबंधकों को नोटिस जारी किया गया था। सभी ने जवाब दिया और प्रशिक्षण में उपस्थित भी हुए। कलेक्टर ने कहा कि यदि आगे भी ऐसी लापरवाही दोहराई गई, तो इसका सीधा असर खरीदी व्यवस्था पर पड़ेगा, और जिम्मेदारों पर कड़ी कार्रवाई निश्चित है।
प्रशासनिक सख्ती का संभावित असर—कितना प्रभाव पड़ेगा?
कलेक्टर उइके ने जिस प्रकार खरीदी प्रक्रिया को अनुशासित करने के निर्देश दिए हैं, उसका जिले में कई स्तरों पर प्रभाव पड़ने की संभावना है— संभावित सकारात्मक असर बिचौलियों पर नियंत्रण बढ़ेगा और पंजीकृत किसानों को सीधा लाभ मिलेगा। खरीदी केंद्रों में अव्यवस्था, देर से खरीदी, और धान की भीड़ जैसी समस्याएं कम होंगी। ई-टोकन व्यवस्था और इलेक्ट्रॉनिक तौल से पारदर्शिता बढ़ेगी। नमी परीक्षण और FAQ प्रदर्शन से विवाद कम होंगे। ESMA लागू होने से कर्मचारियों की उपस्थिति और जवाबदेही में सुधार होगा।
संभावित चुनौतियां
कई केंद्रों में अभी तैयारी अधूरी है—नमी मशीन, बारदाना और स्टेकिंग स्थान की कमी जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं।
बारिश और मौसम बदलने पर स्टोरेज प्रबंधन चुनौती बन सकता है। कुछ दूरस्थ ग्रामों में टोकन समय और व्यवस्था को लेकर शिकायतें रह सकती हैं। बिचौलियों का प्रभाव ग्रामीण क्षेत्रों में पूरी तरह खत्म करना अभी भी मुश्किल है। कलेक्टर की सख्ती से खरीदी प्रक्रिया पर पड़ेगा स्पष्ट असर कलेक्टर उइके द्वारा दिए गए निर्देशों और प्रशिक्षण से यह संदेश साफ है कि इस बार खरीदी प्रक्रिया में न तो लापरवाही चलेगी और न ही अनियमितता। किसानों ने भी उम्मीद जताई है कि यदि प्रशासन के निर्देशों का ईमानदारी से पालन हुआ, तो खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में धान खरीदी बेहतर, पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से पूरी होगी।
Author: थनेश्वर बंजारे
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