विभाग की लापरवाही से त्रैमासिक परीक्षा बनी मजाक!

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शिक्षकों पर ठीकरा, असली जिम्मेदार जिला प्रशासन – सवालों के घेरे में गौरव गरियाबंद योजना

गरियाबंद-:जिले में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के नाम पर चल रहे “गौरव गरियाबंद” अभियान के तहत 22 सितंबर से आयोजित त्रैमासिक परीक्षा अव्यवस्था का शिकार हो गई है। प्रशासन की खामियों के चलते परीक्षा व्यवस्था मजाक बनकर रह गई है।परीक्षा संचालन के लिए प्रश्नपत्र का पीडीएफ संकुल समन्वयकों के माध्यम से एक दिन पूर्व ही प्रधान पाठकों को उपलब्ध कराया जा रहा है। लेकिन जिले के अधिकांश प्राथमिक एवं पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में न तो प्रिंटर की सुविधा है और न ही कोई वैकल्पिक व्यवस्था। मजबूरन शिक्षक फोटो कॉपी दुकानों से प्रश्नपत्र निकलवाकर परीक्षा ले रहे हैं। इससे न केवल परीक्षा की गोपनीयता भंग हो रही है बल्कि कॉपी दुकानों के माध्यम से प्रश्नपत्र बाहर भी जा रहा है। ऐसे में घर-परिवार के बच्चों तक पेपर पहुंचना स्वाभाविक है।वहीं, शिक्षा विभाग ने इस साल एनजीओ को कामकाज से बाहर रखा है, लेकिन जिला प्रशासन गौरव गरियाबंद योजना के नाम पर विनोबा एप डाउनलोड करवाकर शिक्षकों से परीक्षा से जुड़ी जानकारियां जुटा रहा है। शिक्षकों का कहना है कि यह सरासर अनुचित है और परीक्षा लीक की स्थिति में उन्हें दोषी ठहराना गलत होगा, क्योंकि असल जिम्मेदारी जिला प्रशासन की है।जिले में शिक्षा गुणवत्ता सुधार का दावा करने वाले अधिकारी खुद ही परीक्षा गोपनीयता की धज्जियां उड़ा रहे हैं। शिक्षकों व अभिभावकों की मांग है कि सभी कक्षाओं के लिए सिलबंद प्रश्नपत्रों का वितरण किया जाए, तभी गोपनीयता और पारदर्शिता बनी रह सकती है।

थनेश्वर बंजारे
Author: थनेश्वर बंजारे

Dist :- Gariyaband Phone No. :- 7067148964 Gmail :- Banjarethaneshwar544@gmail.com

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