थनेश्वर बंजारे, गरियाबंद
गरियाबंद। जिले की अमाडं ग्राम पंचायत के ग्रामीण आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। बरसात के दिनों में पुल–पुलिया नहीं होने की वजह से लोगों को रोजमर्रा की जिंदगी में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। खासकर बच्चों को स्कूल ले जाना और मरीजों को अस्पताल पहुँचाना किसी चुनौती से कम नहीं है।
कई वर्षों से मांग अधूरी – प्रशासन मौन
ग्रामीणों का कहना है कि वे वर्षों से पुल–पुलिया निर्माण की मांग कर रहे हैं। कई बार यह मुद्दा सड़क से लेकर सदन तक उठाया गया, लेकिन आज तक समस्या जस की तस बनी हुई है।
ग्रामीणों का दर्द
एक ग्रामीण ने कहा – “हम लोग कई बार मांग कर चुके हैं, लेकिन आज तक कोई सुनवाई नहीं हुई। बरसात में हालात और बिगड़ जाते हैं।”
ग्रामीण नेताओं का संघर्ष
इस समस्या को लेकर रतिराम ओटी, गोपालसिंह नेमाम, पुस्तमसिंह मांझी, बलिराम सोरी सहित कई ग्रामीण लगातार संघर्ष कर रहे हैं। वहीं महिलाओं में सुभद्राबाई नेमाम, रेवती नेताम और अन्य भी लगातार आवाज बुलंद कर रही हैं।
ग्रामीणों की चेतावनी
ग्रामीणों ने साफ कहा है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।
प्रशासनिक लापरवाही पर सवाल
अमाडं ग्राम पंचायत की ये तस्वीर प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करती है। अब देखना यह होगा कि शासन–प्रशासन कब तक इनकी सुध लेता है और कब इनकी वर्षों पुरानी मांग पूरी होती है।



Author: थनेश्वर बंजारे
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