“आज डॉक्टर्स डे नहीं, डॉ. चौहान डे है” – गरियाबंद में मसीहा का नाम भरोसे की पहचान

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गरियाबंद एक्सप्रेस न्यूज़ स्पेशल रिपोर्ट | डॉक्टर्स डे 2025

“छोटे जा यार, कुछ नहीं होगा!” — ये महज शब्द नहीं, बल्कि उन हज़ारों दिलों की धड़कन है जो आज ज़िंदा हैं सिर्फ इस विश्वास के कारण। गरियाबंद में जब कोई बीमार होता है, तो सबसे पहले जो नाम उनके होंठों पर आता है, वो है – डॉ. हरीश चौहान।

गरियाबंद -:जिला अस्पताल में 15-17 डॉक्टर तैनात हैं, लेकिन सबसे लंबी कतारें लगती हैं 10 नंबर कक्ष के बाहर — जहां बैठते हैं डॉ. चौहान। यहाँ मरीज नहीं, परिवार आता है। यहाँ दवा से पहले शब्द असर करते हैं, और यहां इलाज से पहले भरोसा दिया जाता है।

“दवा कम, भरोसा ज़्यादा” – 24×7 सेवा देने वाला डॉक्टर जिसे लोग मोबाइल पर भी खोजते हैं

डॉ. चौहान एक ऐसे डॉक्टर हैं जिनके लिए ड्यूटी 10 से 5 तक सीमित नहीं। रात हो या दिन, उनका फोन कभी बंद नहीं होता। कंधे को बोर्ड बना लेते हैं, मोबाइल को टेबल — और वहीं पर मरीज का इलाज शुरू।

उनकी पहचान बन गई है — “मोबाइल डॉक्टर”।

डॉ. चौहान कहते हैं — “बीमारी को डर से नहीं, भरोसे से हराया जा सकता है। मरीज को दिलासा देना ही सबसे बड़ी दवा है।”

उनके पास हर बीमारी का समाधान है, क्योंकि वे सिर्फ सिविल सर्जन नहीं — लोगों के लिए संकट में पहला सहारा हैं। दर्जनों गांवों के लोग उनके घर तक पहुंच जाते हैं। जो दूर हैं, वे मोबाइल पर इलाज पाते हैं। डॉ. चौहान खुद को मरीज नहीं, अपना मानते हैं — और शायद यही उन्हें ख़ास बनाता है।

डॉ. मेमन की विरासत – डॉ. चौहान का संकल्प

गरियाबंद को कभी एक और मसीहा मिला था – डॉ. मेमन।

20 रुपये में इलाज, मुफ़्त परामर्श, अपनापन और मुस्कान — यही थे उनके पहचान। उनके जाने के बाद जो खालीपन था, उसे भरने के लिए डॉ. हरीश चौहान को वापस बुलाया गया।

डॉ. चौहान कहते हैं – “मैं आज जो कुछ भी हूं, वो डॉ. मेमन की वजह से। उन्होंने सिखाया कि डॉक्टर होना सिर्फ प्रोफेशन नहीं, सेवा है। मैं उनकी तरह लोगों के दिलों में बसना चाहता हूं।”

 

कोरोना काल का सच्चा योद्धा – घर-घर पहुंचाया इलाज, मौत को दी मात

जब पूरी दुनिया लॉकडाउन में थी, जब लोग अपने साए से भी डरते थे — उस वक्त डॉ. चौहान ने पीपीई किट पहनकर गांव-गांव, घर-घर जाकर इलाज किया।डरे हुए परिवारों को भरोसा दिया, बीमारों के सिर पर हाथ रखकर कहा – “कुछ नहीं होगा, ठीक हो जाओगे” — और लोग ठीक भी हो गए।

शायद यही कारण है कि गरियाबंद में कोरोना से मृत्यु दर बेहद कम रही।

डॉ. चौहान – एक डॉक्टर नहीं, एक आंदोलन

उनका सपना है — हर गांव में डॉक्टर, हर बच्चे के हाथ में किताब।वे मानते हैं कि शिक्षा और स्वास्थ्य ही समाज को संवार सकते हैं। उनके लिए डॉक्टर्स डे केवल सम्मान का दिन नहीं, सेवा और समाज से जुड़ाव का प्रतीक है।

निष्कर्ष – डॉ. चौहान के बिना अधूरी है गरियाबंद की तस्वीर

“डॉक्टर वो नहीं जो दवा दे, डॉक्टर वो है जो डर दूर करे।”

गरियाबंद की जनता आज कह रही है —

“डॉक्टर्स डे नहीं, ये डॉ. चौहान डे है।”क्योंकि उन्होंने इलाज नहीं, रिश्ते बनाए। दवा नहीं, भरोसा बांटा।और आज गरियाबंद का हर घर, हर दिल यही कहता है —“छोटे जा यार… कुछ नहीं होगा… डॉक्टर चौहान हैं ना!”

थनेश्वर बंजारे
Author: थनेश्वर बंजारे

Dist :- Gariyaband Phone No. :- 7067148964 Gmail :- Banjarethaneshwar544@gmail.com

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