गरियाबंद जिले के स्वामी आत्मानंद स्कूलों में किताबों का संकट, बच्चों के भविष्य से खिलवाड़!

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स्कूल खुले एक सप्ताह से अधिक बीता, लेकिन विद्यार्थियों के हाथों तक नहीं पहुंचीं पाठ्यपुस्तकें

 

गरियाबंद। प्रदेश सरकार एक ओर शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने, आधुनिक शिक्षा व्यवस्था विकसित करने और विद्यार्थियों को बेहतर सुविधाएं देने के बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर गरियाबंद जिले के स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालयों की जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोलती नजर आ रही है। नया शैक्षणिक सत्र 16 जून से शुरू हो चुका है, लेकिन जिले के अनेक स्वामी आत्मानंद विद्यालयों में अब तक विद्यार्थियों को पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध नहीं हो सकी हैं।

 

जानकारी के अनुसार स्वामी आत्मानंद विद्यालय राजिम, फिंगेश्वर, छुरा, गरियाबंद, मैनपुर, देवभोग सहित जिले में संचालित अन्य स्वामी आत्मानंद विद्यालयों में भी पुस्तक वितरण का कार्य पूर्ण नहीं हो पाया है। स्थिति यह है कि बच्चे नियमित रूप से स्कूल पहुंच रहे हैं, लेकिन उनके पास पढ़ने के लिए आवश्यक किताबें नहीं हैं।

 

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब शिक्षा विभाग और शासन को पहले से मालूम था कि 16 जून से नया शैक्षणिक सत्र प्रारंभ होना है, तब पाठ्यपुस्तकों की व्यवस्था समय पर क्यों नहीं की गई? स्कूल खुलने की तिथि कोई अचानक घोषित नहीं हुई थी। विभाग के पास पूरी तैयारी के लिए पर्याप्त समय था, इसके बावजूद सत्र शुरू होने के बाद भी विद्यार्थी किताबों का इंतजार कर रहे हैं।

 

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि शैक्षणिक सत्र के शुरुआती दिन विद्यार्थियों की बुनियाद मजबूत करने के लिए सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। ऐसे समय में यदि किताबें ही उपलब्ध न हों तो पढ़ाई का पूरा ढांचा प्रभावित होता है। शिक्षक कक्षाओं में पढ़ाने का प्रयास जरूर कर रहे हैं, लेकिन बिना पाठ्यपुस्तकों के विद्यार्थियों के लिए विषयों को समझना और घर पर अध्ययन करना बेहद कठिन हो जाता है।

 

यह विडंबना ही है कि सरकार नई शिक्षा नीति, डिजिटल शिक्षा, गुणवत्तापूर्ण शिक्षण और शिक्षा में नवाचार की बातें करती है, लेकिन बच्चों की सबसे मूलभूत आवश्यकता — पाठ्यपुस्तकें — समय पर उपलब्ध नहीं करा पा रही है। करोड़ों रुपये खर्च कर आधुनिक भवन, स्मार्ट क्लास और अन्य सुविधाओं की बात की जाती है, परंतु यदि बच्चों के हाथों में किताबें ही नहीं होंगी तो शिक्षा का स्तर आखिर कैसे बढ़ेगा?

 

पालकों का कहना है कि यह केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं बल्कि विद्यार्थियों के भविष्य के साथ सीधा खिलवाड़ है। जिस समय बच्चों को नए पाठ्यक्रम के साथ पढ़ाई शुरू करनी चाहिए थी, उस समय वे किताबों के इंतजार में बैठे हैं। इससे न केवल उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है बल्कि पूरे शैक्षणिक सत्र की गति भी धीमी पड़ रही है।

 

जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग को इस गंभीर समस्या पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है। यदि समय रहते सभी विद्यालयों में पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध नहीं कराई गईं तो इसका खामियाजा सीधे विद्यार्थियों को भुगतना पड़ेगा।

 

अब सवाल यह है कि जब स्कूल खुलने की पूरी जानकारी पहले से थी, तब तैयारी क्यों नहीं हुई? क्या शिक्षा के नाम पर केवल घोषणाएं ही होंगी या फिर बच्चों के भविष्य को लेकर वास्तविक संवेदनशीलता भी दिखाई जाएगी? गरियाबंद जिले के हजारों विद्यार्थी और उनके अभिभावक आज इसी प्रश्न का उत्तर तलाश रहे हैं।

थनेश्वर बंजारे
Author: थनेश्वर बंजारे

Dist :- Gariyaband Phone No. :- 7067148964 Gmail :- Banjarethaneshwar544@gmail.com

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