*(लगभग 20 किलोमीटर की कठिन एवं खड़ी चढ़ाई पार कर बाबा केदारनाथ के किए दर्शन, 6 किलोमीटर पैदल चढ़ाई कर पहुँचे यमुनोत्री धाम)*
*गरियाबंद।* धार्मिक आस्था, सनातन संस्कृति और देवभूमि उत्तराखंड के प्रति अटूट श्रद्धा का परिचय देते हुए राजिम क्षेत्र के ग्राम सरकड़ा के युवाओं ने पवित्र चारधाम यात्रा सफलतापूर्वक संपन्न की। यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं ने कठिन मौसम, दुर्गम पहाड़ी रास्तों एवं लगातार पैदल चढ़ाई का सामना करते हुए यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ एवं बद्रीनाथ धाम के दर्शन कर देश एवं प्रदेश की सुख-समृद्धि, खुशहाली और जनकल्याण की कामना की।
यात्रा का सबसे चुनौतीपूर्ण पड़ाव भगवान भोलेनाथ की नगरी केदारनाथ धाम रहा, जहाँ श्रद्धालुओं ने लगभग 20 किलोमीटर की कठिन एवं खड़ी चढ़ाई तय कर बाबा केदारनाथ के दर्शन किए। वहीं यमुनोत्री धाम पहुँचने के लिए जानकीचट्टी से लगभग 6 किलोमीटर की खड़ी पर्वतीय चढ़ाई पैदल पूरी करनी पड़ी। कठिन चढ़ाई, ठंडी हवाओं और ऊँचे पहाड़ों के बीच श्रद्धालुओं ने “जय माँ यमुना” और “हर हर महादेव” के जयघोष के साथ यात्रा पूरी कर दिव्य दर्शन लाभ प्राप्त किया। यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं ने गंगोत्री धाम प्रस्थान के समय उत्तरकाशी स्थित प्राचीन काशी विश्वनाथ मंदिर में भी दर्शन-पूजन कर भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त किया। धार्मिक मान्यता के अनुसार यह मंदिर अत्यंत प्राचीन एवं उत्तर भारत के प्रमुख शिवालयों में से एक माना जाता है। कहा जाता है कि भगवान शिव ने स्वयं इस पवित्र भूमि को अपनी काशी के समान महत्व प्रदान किया था, जिसके कारण उत्तरकाशी को “उत्तर की काशी” भी कहा जाता है। भागीरथी नदी के तट पर स्थित यह मंदिर अपनी दिव्यता, आध्यात्मिक ऊर्जा एवं प्राचीन धार्मिक परंपराओं के लिए प्रसिद्ध है। श्रद्धालुओं ने मंदिर परिसर में स्थित विशाल त्रिशूल के दर्शन भी किए, जिसके बारे में मान्यता है कि यह देवी-देवताओं की दिव्य शक्ति का प्रतीक है। मंदिर में दर्शन के दौरान श्रद्धालुओं ने देश, प्रदेश एवं क्षेत्र की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। साथ ही श्रद्धालुओं ने उत्तरकाशी जनपद में स्थित प्रसिद्ध प्राकृतिक प्राचीन प्रकटेश्वर पंचमुखी महादेव शिव गुफा के भी दर्शन किए।
केदारनाथ धाम यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं ने बाबा केदारनाथ मंदिर के समीप स्थित भैरवनाथ मंदिर में भी दर्शन कर पूजा-अर्चना की। साथ ही वर्ष 2013 की आपदा में केदारनाथ मंदिर की रक्षा करने वाली दिव्य भीम शिला का भी दर्शन किया। श्रद्धालुओं ने इसे भगवान शिव की कृपा और आस्था का अद्भुत प्रतीक बताया। चारधाम यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं ने उत्तराखंड के प्रसिद्ध पंच प्रयागों में शामिल विष्णुप्रयाग, नंदप्रयाग, कर्णप्रयाग, रुद्रप्रयाग एवं देवप्रयाग का भी दर्शन किया। यात्रियों ने विष्णुप्रयाग में अलकनंदा एवं धौलीगंगा नदी के संगम, नंदप्रयाग में अलकनंदा एवं नंदाकिनी नदी के संगम, कर्णप्रयाग में अलकनंदा एवं पिंडर नदी के पावन संगम तथा रुद्रप्रयाग में अलकनंदा एवं मंदाकिनी नदी के दिव्य संगम का दर्शन किया। वहीं देवप्रयाग में भागीरथी एवं अलकनंदा नदी के संगम के बाद माँ गंगा के रूप में प्रवाहित होती पावन धारा का दर्शन कर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।
यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं ने भारत के प्रथम गाँव माणा में स्थित पवित्र सरस्वती नदी उद्गम क्षेत्र एवं प्रसिद्ध भीम पुल का भी दर्शन किया। धार्मिक मान्यता के अनुसार महाभारत काल में पांडवों के स्वर्गारोहण के दौरान भीम द्वारा विशाल शिला रखकर यह पुल बनाया गया था। सरस्वती नदी की प्रचंड धारा एवं हिमालय की अद्भुत प्राकृतिक सुंदरता ने यात्रियों को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं ने हिमालय की बर्फ से ढकी पर्वत श्रृंखलाओं, विशाल ग्लेशियरों, प्राकृतिक झरनों एवं मनमोहक वॉटरफॉल का भी अद्भुत दृश्य देखा। ऊँचे-ऊँचे पहाड़, घाटियाँ, कल-कल बहती नदियाँ एवं प्राकृतिक सौंदर्य ने यात्रियों को मंत्रमुग्ध कर दिया। श्रद्धालुओं ने बताया कि देवभूमि उत्तराखंड की प्राकृतिक सुंदरता एवं आध्यात्मिक वातावरण जीवनभर याद रहने वाला अनुभव है। इसके अलावा श्रद्धालुओं ने माँ धारादेवी शक्तिपीठ में पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद प्राप्त किया। साथ ही ऋषिकेश एवं हरिद्वार स्थित विभिन्न धार्मिक एवं आध्यात्मिक स्थलों का भी दर्शन किया। हरिद्वार के प्रसिद्ध हर की पौड़ी में पवित्र गंगा स्नान एवं भव्य गंगा आरती में शामिल होकर श्रद्धालुओं ने आध्यात्मिक शांति का अनुभव किया। इसके अलावा शांतिकुंज, माँ मनसा देवी शक्तिपीठ सहित अनेक धार्मिक स्थलों में दर्शन कर क्षेत्र की सुख-समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की गई। यात्रा में शामिल युवाओं ने बताया कि चारधाम यात्रा केवल धार्मिक यात्रा नहीं बल्कि आत्मिक शुद्धि, संयम, अनुशासन एवं भारतीय संस्कृति को निकट से अनुभव करने का दिव्य अवसर है। ऊँचे हिमालय, बर्फ से ढकी पर्वत श्रृंखलाएँ, कल-कल बहती पवित्र नदियाँ एवं मंदिरों की दिव्यता ने यात्रा को अविस्मरणीय बना दिया।
यात्रा में प्रमुख रूप से भाजयुमो प्रदेश कार्यसमिति सदस्य विरेन्द्र कुमार साहू, प्रदेश कार्यसमिति सदस्य मछुवारा प्रकोष्ठ मदन निषाद, ग्राम पंचायत सरकड़ा उपसरपंच महेश्वर साहू, हेमंत साहू सहित क्षेत्र के अनेक युवा श्रद्धालु शामिल रहे। विरेन्द्र कुमार साहू ने कहा कि “चारधाम यात्रा भारतीय सनातन संस्कृति की जीवंत पहचान है। कठिन परिस्थितियों और लंबी पैदल यात्रा के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था यह सिद्ध करती है कि भारत की आध्यात्मिक चेतना आज भी विश्व में अद्वितीय है। युवाओं को जीवन में एक बार अवश्य देवभूमि उत्तराखंड की यात्रा करनी चाहिए।”
यात्रा के दौरान क्षेत्रवासियों, मित्रों एवं परिजनों ने सभी यात्रियों को सफल यात्रा की शुभकामनाएँ दीं। लोगों ने कहा कि इस प्रकार की धार्मिक यात्राएँ युवाओं में संस्कार, आध्यात्मिक चेतना और भारतीय संस्कृति के प्रति सम्मान को मजबूत करती हैं तथा समाज को सकारात्मक दिशा प्रदान करती हैं।
Author: थनेश्वर बंजारे
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