“नौकरी के नाम पर वसूली से लेकर अस्पतालों पर मेहरबानी तक
गरियाबंद स्वास्थ्य विभाग पर उठे बड़े सवाल, भर्ती प्रक्रिया और निजी अस्पतालों की जांच की मांग तेज”
गरियाबंद-: जिले का स्वास्थ्य विभाग एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में आ गया है। संविदा भर्ती प्रक्रिया में कथित पैसों के लेनदेन, कर्मचारियों द्वारा नौकरी लगवाने के नाम पर रकम लेने और निजी अस्पतालों पर कार्रवाई में पक्षपात जैसे आरोपों ने पूरे विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
नौकरी वाले मामले में ऑडियो रिकॉर्डिंग, और स्क्रीनशॉट सामने आने का दावा किया जा रहा है, जिसके बाद अब इस पूरे प्रकरण को हाईकोर्ट तक ले जाने की तैयारी की बात कही जा रही है।
सूत्रों के अनुसार, स्वास्थ्य विभाग की हालिया संविदा भर्ती प्रक्रिया में चयन सूची में नाम लाने के लिए कुछ लोगों से पैसे मांगे गए थे। आरोप है कि सरकारी अस्पताल में पदस्थ एक ओटी टेक्नीशियन ने स्वयं मोबाइल पर बातचीत के दौरान स्वीकार किया कि उसे “ऊपर से” पैसे लेने के लिए कहा गया था। बातचीत में कथित तौर पर गरियाबंद सीएमएचओ कार्यालय का नाम भी लिया गया है।
अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या सरकारी कर्मचारी नौकरी दिलाने के नाम पर पैसों का लेनदेन कर सकते हैं?
यदि ऐसा हुआ है तो इसके पीछे केवल कर्मचारी हैं या विभाग के बड़े अधिकारी भी शामिल हैं?
मामले को लेकर लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। इससे पहले भी जिले में पटवारी और पुलिस विभाग से जुड़े ऑडियो-वीडियो वायरल होने के बाद कार्रवाई हुई थी, लेकिन स्वास्थ्य विभाग से जुड़े इस गंभीर आरोप पर अब तक किसी प्रकार की स्पष्ट जांच या कार्रवाई सामने नहीं आई है। यही वजह है कि भर्ती प्रक्रिया में धांधली और अपात्र लोगों की नियुक्ति को लेकर भी संदेह गहराता जा रहा है।
इधर, निजी अस्पतालों पर कार्रवाई को लेकर भी स्वास्थ्य विभाग पर पक्षपात के आरोप लग रहे हैं। जिले के कुछ अस्पतालों पर निलंबन और कार्रवाई हुई, लेकिन छुरा क्षेत्र स्थित कथित “श्री संकल्प छत्तीसगढ़ हॉस्पिटल” पर गंभीर आरोप और कई विवादों के बावजूद ठोस कार्रवाई नहीं होने से विभाग की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि आयुष्मान कार्ड गड़बड़ी, मरीजों की मौत और अन्य शिकायतों के बाद भी अस्पताल को केवल नोटिस देकर मामला दबाने की कोशिश की जा रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि अन्य अस्पतालों पर कड़ी कार्रवाई हो सकती है, तो इस अस्पताल पर अलग रवैया क्यों अपनाया जा रहा है? कहीं न कहीं विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत और संरक्षण की आशंका जताई जा रही है। यही कारण है कि अब भर्ती प्रक्रिया से लेकर निजी अस्पतालों पर कार्रवाई तक पूरे स्वास्थ्य विभाग की उच्च स्तरीय जांच की मांग तेज हो गई है।
सूत्रों के मुताबिक, मामले को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर करने की तैयारी चल रही है, जिसमें स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों और जिला प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठाए जाएंगे। यदि सामने आए ऑडियो, स्क्रीनशॉट और अन्य दस्तावेज सही पाए जाते हैं, तो यह मामला जिले के सबसे बड़े भर्ती और रिश्वत कांडों में से एक साबित हो सकता है।
अब देखना होगा कि स्वास्थ्य विभाग इन आरोपों पर क्या जवाब देता है और क्या वास्तव में पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होगी या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।
Author: थनेश्वर बंजारे
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