खबर का असर: केडीआमा में 2 माह से जूझ रहे कमार परिवारों को मिली राहत, रातों-रात हुआ बोरखनन, विभाग ने लिया संज्ञान
गरियाबंद | छुरा ब्लॉक
गरियाबंद जिले के छुरा ब्लॉक अंतर्गत मुख्यमंत्री गोद ग्राम केडीआमा (रमनपुर) में पेयजल संकट को लेकर प्रकाशित खबर का असर अब साफ नजर आने लगा है। दो महीनों से झरिया के दूषित पानी पर निर्भर विशेष पिछड़ी जनजाति कमार परिवारों की समस्या को गंभीरता से लेते हुए PHE विभाग हरकत में आया और तत्काल मौके पर टीम भेजकर बोरवेल निर्माण का कार्य शुरू करा दिया।
जानकारी के अनुसार, लंबे समय से गांव का सौर बोरवेल खराब पड़ा था, जिससे कमार परिवारों को मजबूरी में असुरक्षित और मटमैला झरिया का पानी पीना पड़ रहा था। इससे उनके स्वास्थ्य पर भी खतरा बना हुआ था। इस संबंध में स्थानीय जनप्रतिनिधियों द्वारा पहले ही विभाग को सूचना दी गई थी, लेकिन कार्रवाई नहीं होने से ग्रामीणों की परेशानी लगातार बढ़ती जा रही थी।
मामला मीडिया में सामने आते ही विभाग ने त्वरित संज्ञान लिया और जिस कार्य में सामान्यतः एक-दो सप्ताह का समय लगता, उसे प्राथमिकता देते हुए तुरंत बोरवेल मशीन और टीम को रवाना किया गया। शनिवार शाम टीम गांव पहुंची और देर रात तक बोरखनन का कार्य पूरा कर लिया गया।
बोरवेल निर्माण के बाद गांव में खुशी का माहौल है। कमार परिवारों ने राहत की सांस लेते हुए कहा कि अब उन्हें भीषण गर्मी में साफ और ठंडा पानी उपलब्ध हो सकेगा। उन्होंने इसके लिए मीडिया और प्रशासन का आभार जताया।
ग्राम सरपंच योगेश ध्रुव ने भी विभाग की इस पहल को सकारात्मक कदम बताते हुए कहा कि भले ही कार्रवाई देर से हुई, लेकिन अब समस्या का समाधान हो गया है। उन्होंने कहा कि मीडिया के सहयोग से दो महीने से परेशान कमार परिवारों को अब झरिया के दूषित पानी से छुटकारा मिल गया है।
Author: थनेश्वर बंजारे
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