राजिम ।छत्तीसगढ़ शौर्य और स्वाभिमान के प्रतीक छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती पूरे देश में हर्षोल्लास के साथ मनाई गई, लेकिन धर्मनगरी राजिम में इस बार नजारा कुछ अलग और भावुक करने वाला था। यहाँ के मराठा समाज ने किसी भव्य प्रतिमा के अभाव में केवल प्रतीकात्मक रूप से जयंती मनाई। यह आयोजन उत्सव से ज्यादा शासन की कार्यप्रणाली पर एक गहरा कटाक्ष और विरोध का स्वर नजर आया।मराठा समाज के सदस्यों का आरोप है कि शासन द्वारा लंबे समय से शिवाजी महाराज की प्रतिमा स्थापित करने के लिए राशि की मांग की जा रही है। समाज का कहना है कि शिवाजी महराज के अश्वारोही प्रतिमा हेतु मुख्यमंत्री के राजिम आगमन पर दो वर्ष पूर्व आवेदन किया गया था जिस पर उनके आश्वासन मिलने के बावजूद, अब तक इसके लिए फंड स्वीकृत नहीं किया गया है। स्थानीय जनप्रतिनिधि से भी आग्रह किया जा चुका है कि राशि स्वीकृति हेतु आवश्यक पहल करें।समाज के पदाधिकारियों ने कड़े शब्दों में कहा कि एक तरफ सरकार राज्य की संस्कृति और महापुरुषों के सम्मान की बातें करती है, वहीं दूसरी तरफ राजिम जैसे ऐतिहासिक स्थल पर शिवाजी महाराज की मूर्ति के लिए फाइलें दबी हुई हैं।इस वर्ष राजिम में समाज के लोगों ने मूर्ति स्थापना हेतु निर्मित चबूतरे पर दीप प्रज्ज्वलित कर और महाराज के चित्र की पूजा कर रस्म अदायगी की। समाज के युवाओं ने कहा, “यह हमारे लिए गर्व का दिन है, लेकिन शासन की उपेक्षा के कारण हमें बिना मूर्ति के यह पर्व मनाना पड़ रहा है। यह अपमान केवल मराठा समाज का नहीं, बल्कि उन मूल्यों का भी है जिनके लिए शिवाजी महाराज खड़े थे।” इस अवसर पर छग मराठा समाज के अध्यक्ष राघोबा महाड़िक, राजिम मराठा समाज अध्यक्ष ललित महाड़िक, मीता महाड़िक, आशीष शिंदे, आदर्श शिंदे, जगमोहन घाटगे, तात्या राव शिंदे, गंगोत्री पालकर, सोनल महाड़िक, डॉ अक्षदा महाड़िक, जिला पंचायत सदस्य इंद्रजीत महाड़िक, अंजली घाटगे, ईश्वर राव लिंबेकर, पद्मा लिंबेकर, प्रभाकर मोरे, शैल चौहान, दिगेंद्र चौहान, सुयश पालकर, सागर चौहान, प्रीति मोरे, अनमोल शिंदे, हेमंत भोसले, आदि उपस्थित थे।
Author: थनेश्वर बंजारे
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