धान का पहाड़, उठाव बेअसर: गरियाबंद में फड़ों पर बढ़ता दबाव, मिलरों की सुस्ती से सिस्टम सवालों के घेरे में

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गरियाबंद-:छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में इस वर्ष समर्थन मूल्य पर 50 लाख 65 हजार 726 क्विंटल धान की खरीदी हुई, लेकिन उठाव की रफ्तार ने पूरे तंत्र की चिंता बढ़ा दी है। अब तक केवल 28 लाख 25 हजार 888 क्विंटल धान का ही परिवहन हो सका है—यानी करीब 56.45 प्रतिशत। यह आंकड़ा पिछले दो वर्षों की तुलना में 15 से 20 फीसदी कम बताया जा रहा है।

 

फड़ों पर धान का ढेर बढ़ता जा रहा है। कई केंद्रों में बफर लिमिट से कई गुना अधिक स्टॉक जमा है, जिससे रखरखाव का खर्च बढ़ रहा है और सुखत (वजन घटने) का खतरा मंडरा रहा है। यदि वजन में कमी आती है तो इसकी जिम्मेदारी खरीदी केंद्रों पर तय होती है—कमीशन में कटौती और अंतर राशि की भरपाई तक की नौबत आ सकती है। यही कारण है कि समितियां लगातार पत्राचार कर स्थिति की गंभीरता से अवगत करा रही हैं।

 

*मिलरों की ठंडी प्रतिक्रिया, जारी डीओ के बावजूद उठाव कम*

जिले में कुल 57 राइस मिल हैं, लेकिन इस सीजन में केवल 45 मिलरों को डीओ जारी हुआ।

 

पिछले एक माह में 21 लाख 17 हजार 650 क्विंटल धान मिलों के लिए जारी किया गया, जबकि वास्तविक उठाव 13 लाख 73 हजार 110 क्विंटल तक ही सीमित रहा

 

जानकारों के मुताबिक कई मिलरों के पास पहले से पुराना स्टॉक मौजूद है। एफसीआई में चावल रखने की सीमित क्षमता और बैंक गारंटी की राशि फंसी होने जैसे कारणों से मिलर सक्रियता नहीं दिखा पा रहे। नतीजा—धान खरीदी केंद्रों पर दबाव बढ़ता जा रहा है।

 

*परिवहन सुस्त, लक्ष्य से पीछे*

 

रिपोर्ट के अनुसार 16 लाख 98 हजार 840 क्विंटल के परिवहन आदेश जारी किए गए, परंतु ट्रांसपोर्टर अब तक लगभग 13 लाख 74 हजार क्विंटल ही उठा सके हैं। कई केंद्रों में ट्रकों की कमी और समन्वय के अभाव से उठाव की गति और धीमी पड़ी है।

 

*प्रशासन का पक्ष*

 

डीएमओ मार्कफेड किशोर चंद्र का कहना है कि सभी केंद्रों के लिए पर्याप्त टीओ और डीओ जारी किए गए हैं, उठाव में तेजी लाने के प्रयास जारी हैं।

 

जिला खाद्य अधिकारी अरविंद दुबे ने भी दावा किया कि अधिकतम क्षमता से उठाव कराया जा रहा है और सभी केंद्रों का नियमित भौतिक सत्यापन हो रहा है।

 

*समितियों में बढ़ी बेचैनी*

 

छुरा, फिंगेश्वर, देवभोग, मैनपुर और अमलीपदर सहित कई ब्लॉकों की समितियों में एक ही चिंता है—यदि जल्द उठाव नहीं हुआ तो सुखत और जवाबदेही का संकट खड़ा हो सकता है। व्यवस्थापक और समिति अध्यक्षों पर दबाव बढ़ता जा रहा है।

 

गरियाबंद में धान खरीदी तो रिकॉर्ड रही, पर उठाव की सुस्ती ने पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब नजर इस बात पर है कि प्रशासन और मिलर मिलकर इस बढ़ते “धान के पहाड़” को कितनी तेजी से कम कर पाते हैं।

थनेश्वर बंजारे
Author: थनेश्वर बंजारे

Dist :- Gariyaband Phone No. :- 7067148964 Gmail :- Banjarethaneshwar544@gmail.com

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