राजिम -:जिला गरियाबंद
छत्तीसगढ़ के प्रयाग कहे जाने वाले राजिम में 1 फरवरी से 15 फरवरी तक आयोजित राजिम कुंभ कल्प इस बार अव्यवस्था और इवेंट कंपनी की मनमानी के कारण सुर्खियों में है। जहां एक ओर यह आयोजन आस्था, श्रद्धा और संस्कृति का संगम माना जाता है, वहीं इस बार मुख्य मंच पर खाली पड़ी कुर्सियां और सूने पंडाल आयोजन की हकीकत बयान कर रहे हैं।

स्थानीय श्रद्धालुओं और व्यापारियों का आरोप है कि आयोजन की जिम्मेदारी संभाल रही इवेंट कंपनी ने पूरे मेला स्थल को बैरिकेड्स से इस तरह घेर दिया है कि आम लोग मुख्य मंच तक पहुंच ही नहीं पा रहे हैं।
हर जगह पास सिस्टम और रोक-टोक से श्रद्धालु खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं।
इतना ही नहीं, पत्रकारों के साथ अभद्र व्यवहार और बदसलूकी की घटनाएं भी सामने आई हैं। कवरेज के दौरान कई मीडियाकर्मियों को रोकने और दुर्व्यवहार करने के आरोप लगे हैं, जिससे नाराजगी और बढ़ गई है।
मेला परिसर में आम श्रद्धालुओं की बजाय प्रशासनिक अमला और पुलिस बल की मौजूदगी ज्यादा नजर आ रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस बार राजिम कुंभ में वह पारंपरिक रौनक और आध्यात्मिक माहौल नहीं दिख रहा, जो वर्षों से इसकी पहचान रहा है।
इस बीच छत्तीसगढ़ शासन के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने मेले का दौरा कर व्यवस्थाओं को जल्द दुरुस्त करने का आश्वासन दिया है।

उन्होंने कम भीड़ को नए स्थल से जोड़ते हुए कहा कि व्यवस्थाएं सुदृढ़ की जा रही हैं।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या आस्था के इस महापर्व को इवेंट मैनेजमेंट के नाम पर सीमित और नियंत्रित कर दिया गया है? और क्या प्रशासन आयोजन की गरिमा बहाल कर पाएगा?
Author: थनेश्वर बंजारे
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