जिला जेल गरियाबंद का निरीक्षण, 18 वर्ष से कम आयु का कोई बंदी नहीं मिला

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गरियाबंद-: सर्वोच्च न्यायालय एवं बाल अधिकार संरक्षण आयोग नई दिल्ली के निर्देशानुसार जेलों में निवासरत बंदियों का उम्र सत्यापन कराया जा रहा है। उम्र निर्धारण में संदेह या प्रक्रियागत त्रुटि के कारण कभी-कभी बच्चे भी जेलों में निरुद्ध हो जाते हैं। ऐसे मामलों की रोकथाम हेतु अधिवक्ताओं एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं की समिति द्वारा प्रत्येक त्रैमास में जेल निरीक्षण किया जाता है।इसी क्रम में महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी अशोक कुमार पाण्डेय के निर्देश और जिला बाल संरक्षण अधिकारी अनिल द्विवेदी के मार्गदर्शन में जिला जेल गरियाबंद का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण समिति में पूर्णिमा तिवारी (सदस्य किशोर न्याय बोर्ड), ताकेश्वरी साहू (सदस्य बाल कल्याण समिति), अधिवक्ता हेमराज दाऊ, सामाजिक कार्यकर्ता लता नेताम (लोक आस्था) एवं शरदचंद निषाद (विधिक सह परिविक्षा अधिकारी) शामिल रहे।समिति ने 05 बैरकों का निरीक्षण कर बंदियों से मुलाकात की और उनकी वास्तविक आयु की जानकारी ली। इस दौरान 18 वर्ष से कम आयु का कोई भी बंदी निरुद्ध नहीं पाया गया।निरीक्षण के दौरान एक बंदी ने बताया कि उसकी पत्नी की मृत्यु हो चुकी है तथा बच्चों की देखभाल के लिए घर में कोई नहीं है। इस पर समिति ने बच्चों के देखभाल एवं संरक्षण हेतु आवश्यक कार्यवाही का आश्वासन दिया।गौरतलब है कि पूर्व निरीक्षण के दौरान 02 बालकों को शासन की महत्वाकांक्षी योजना स्पॉन्सरशिप से लाभान्वित करने हेतु अनुशंसा की गई थी।

 

थनेश्वर बंजारे
Author: थनेश्वर बंजारे

Dist :- Gariyaband Phone No. :- 7067148964 Gmail :- Banjarethaneshwar544@gmail.com

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