गरियाबंद/फिंगेश्वर। ग्राम पंचायत बासींन के ग्रामीण अब सड़क की बदहाली से तंग आ चुके हैं। वर्षों से विभागीय लापरवाही और अधूरे निर्माण के कारण आमजन को रोज़ाना जान जोखिम में डालकर सफर करना पड़ रहा है। पंचायत द्वारा लोक निर्माण विभाग को भेजे गए पत्रों और ग्रामीणों के बयान ने साफ कर दिया है कि सड़क की स्थिति अब सिर्फ असुविधा नहीं बल्कि गंभीर खतरा बन चुकी है।
गड्ढों से पटे मार्ग – मौत को दावत दे रही सड़कें ग्राम पंचायत बासींन के सरपंच और ग्रामीणों ने बताया कि गाँव के कई मार्ग पूरी तरह गड्ढों में तब्दील हो चुके हैं। हालत यह है कि बरसात में सड़कों पर जलभराव और फिसलन के कारण लोग गिरकर घायल हो जाते हैं। एंबुलेंस, स्कूली वाहन और दोपहिया वाहन चालक रोज़ हादसों के डर के साए में गुजरते हैं। ग्रामीणों ने तत्काल मरम्मत की मांग करते हुए जिन मार्गों को प्राथमिकता दी है, उनमें शामिल हैं – ग्रामीण बैंक के पास पोखरा मार्ग मौलीपारा पोखरा मार्ग बासींन सतनामी पारा बासींन से भसेरा मार्ग (खपरीपारा – तिलक मोबाइल दुकान के पास) खदान मार्ग बासींन फैक्ट्री पाराअरंड से बासींन मार्ग 2023 से स्वीकृत सड़क बनी ‘अधूरी कहानी’
ग्राम पंचायत द्वारा विभाग को भेजे दूसरे पत्र में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। बकली से बरभाठा सड़क का निर्माण कार्य वर्ष 2022-23 में ही
स्वीकृत हो चुका था। लेकिन विभाग की सुस्ती और ठेकेदार की लापरवाही के चलते आज तक काम पूरा नहीं हुआ। बकली से अरंड तक तो सड़क बन गई, मगर अरंड से बरभाठा तक का काम अधर में लटका है। यह सड़क बनने से हजारों लोगों को सीधा लाभ मिलता, लेकिन विभाग की नींद और ठेकेदार की आधी-अधूरी जिम्मेदारी के कारण अब तक ग्रामीणों को धूल-मिट्टी और कीचड़ से जूझना पड़ रहा है।
ठेकेदार और विभाग पर उठ रहे सवाल ग्रामीणों ने तीखे सवाल उठाए हैं – क्या ठेकेदार ने आधा-अधूरा काम दिखाकर कागज़ों में सड़क पूरी बता दी? क्या विभागीय अफसरों ने जानबूझकर अनदेखी की? या फिर प्रशासनिक खामियों के कारण निर्माण बीच में ही रोक दिया गया?
ग्रामीणों का कहना है कि चाहे गलती विभाग की हो या ठेकेदार की, भुगतना तो आम जनता को ही पड़ रहा है।
ग्राम पंचायत की चेतावनी – आंदोलन की तैयारी ग्राम पंचायत बासींन के सरपंच व उपसरपंच ने साफ कहा है कि अगर अधूरी सड़क का निर्माण और जर्जर मार्गों की मरम्मत तत्काल नहीं की गई तो ग्रामीण उग्र आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।
मीडिया कि पड़ताल
हमारी पड़ताल ने यह साफ कर दिया है कि लोक निर्माण विभाग की लापरवाही और ठेकेदार की सुस्ती से स्वीकृत सड़क अधूरी है। विभाग ने अब तक कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया है। सवाल यह है कि जब शासन-प्रशासन ने 2023 में सड़क स्वीकृत कर दी थी तो आखिर तीन साल बाद भी ग्रामीण बदहाल सड़कों पर क्यों भटक रहे हैं? क्या जिम्मेदार अधिकारी ग्रामीणों की पीड़ा सुनेंगे या फिर आंदोलन के बाद ही कार्रवाई होगी?
Author: थनेश्वर बंजारे
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