बेमेतरा। छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले के ग्राम मोहतरा (ख) निवासी सामदास सतनामी ने जिला प्रशासन को एक भावुक पत्र लिखकर अपने पूरे 17 सदस्यीय परिवार के लिए इच्छा मृत्यु की अनुमति मांगी है।
सामदास का आरोप है कि प्रशासन और न्यायालय हर जगह उनके साथ जातिगत भेदभाव किया जा रहा है। वर्ष 2009 में सरपंच और उपसरपंच द्वारा बस्ती से बाहर बसाए जाने के बाद से ही उन्हें लगातार उत्पीड़न सहना पड़ रहा है। उन्होंने लिखा है कि 2011 में उनका घर तोड़ा और जला दिया गया, वहीं 2019 में पुलिस की मौजूदगी में उन्हें अर्धनग्न अवस्था में पूरे गांव में घुमाकर अपमानित किया गया।
सतनामी ने बताया कि उनके छोटे बच्चों को भी उस समय सखी सेंटर भेजा गया था। हाल ही में 18 जून 2025 को तहसीलदार ने पुलिस की मौजूदगी में जेसीबी से उनका घर ध्वस्त करवा दिया, जिससे बरसात के मौसम में उनका पूरा परिवार बेघर हो गया।
उन्होंने कहा कि जातीय द्वेष के चलते उनकी बिजली काट दी गई, पानी के लिए तीन किलोमीटर दूर जाना पड़ता है और हर बार उनके ही शासकीय जमीन पर अतिक्रमण की शिकायतें उठाई जाती हैं।
पत्र में उन्होंने लिखा है—
“मैं भी भारत का निवासी हूं, लेकिन मुझे बार-बार यह एहसास दिलाया जा रहा है कि मैं निर्वासित हूं। जब हमारी नागरिकता और अस्तित्व पर ही संदेह है तो हमें इच्छा मृत्यु की अनुमति दी जाए ताकि बार-बार हमारी सामाजिक गरिमा तार-तार न हो।”
सामदास सतनामी ने इस संबंध में प्रधानमंत्री, कानून मंत्री, सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश, राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय अनुसूचित जाति आयोग, राज्यपाल, मुख्यमंत्री सहित विभिन्न राजनीतिक दलों के राष्ट्रीय व प्रदेश अध्यक्षों को भी पत्र की प्रतिलिपि भेजी है।
Author: थनेश्वर बंजारे
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