CHC में ड्यूटी कैसे? स्वास्थ्य संचालनालय के आदेश को ठेंगा दिखाकर चल रही है मनमानी
छुरा। बच्चों के स्वास्थ्य परीक्षण और समय पर उपचार की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए संचालित राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम चिरायु की व्यवस्था को लेकर छुरा विकासखंड में सवाल खड़े हो रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग द्वारा हर माह जारी ड्यूटी चार्ट में चिरायु टीमों के लिए स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों का भ्रमण कार्यक्रम निर्धारित किया जाता है, लेकिन आरोप है कि कई जगह तय तारीख पर टीम नहीं पहुंच रही है। कुछ संस्थानों में लंबे समय से चिरायु टीम के नहीं पहुंचने की जानकारी भी सामने आई है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या छुरा ब्लॉक में चिरायु कार्यक्रम निर्धारित शेड्यूल के मुताबिक चल रहा है या फिर इसमें मनमानी हो रही है?
जानकारी के मुताबिक कुछ स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए बाकायदा भ्रमण कार्यक्रम जारी होने के बावजूद निर्धारित दिन टीम की मौजूदगी नहीं रही। वहीं कुछ स्थानों पर तय तारीख के बजाय दूसरे दिन स्वास्थ्य परीक्षण किए जाने की बात सामने आई है। यदि ड्यूटी कार्यक्रम में बदलाव किया जाता है तो संबंधित स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र को इसकी जानकारी दिए जाने की व्यवस्था भी सवालों के घेरे में है।
मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि चिरायु कार्यक्रम का उद्देश्य महज बच्चों की औपचारिक जांच करना नहीं, बल्कि जन्मजात बीमारियों, कमियों, पोषण संबंधी समस्याओं और अन्य स्वास्थ्य दिक्कतों की पहचान कर उन्हें उपचार अथवा आवश्यकतानुसार रेफरल सुविधा उपलब्ध कराना है। ऐसे में यदि टीम नियमित रूप से निर्धारित संस्थानों तक नहीं पहुंचती है तो बच्चों को मिलने वाली स्वास्थ्य सुविधा की वास्तविक स्थिति पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
संचालनालय के निर्देश के बावजूद दूसरी ड्यूटी का सवाल
स्वास्थ्य संचालनालय ने 3 जुलाई 2025 को जारी निर्देश में RBSK के तहत कार्यरत चिरायु दलों और DEIC के स्टाफ को निर्धारित कार्यक्रम के अलावा अन्य कार्यों में नहीं लगाने तथा अन्यत्र अटैच नहीं करने के निर्देश दिए थे। साथ ही चिरायु दलों को निर्धारित ATP के अनुसार स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों का नियमित भ्रमण कर बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण करने को कहा गया था।

इसके बावजूद छुरा ब्लॉक में चिरायु टीम के कर्मचारियों की अन्य कार्यों में ड्यूटी लगाए जाने को लेकर सवाल सामने आए हैं। सूत्रों के अनुसार चिरायु टीम में मेडिकल ऑफिसर के रूप में कार्यरत डॉ. तरुण पटेल की 22 तारीख को एक प्राथमिक स्कूल में स्वास्थ्य परीक्षण के लिए ड्यूटी निर्धारित थी। इसी दिन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र छुरा में उनकी मौजूदगी को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। ऐसे में यह स्पष्ट होना जरूरी है कि संबंधित दिन उनकी ड्यूटी किस आदेश अथवा व्यवस्था के तहत निर्धारित की गई थी।
दूसरे डॉक्टर की पर्ची पर दवा लिखने का आरोप, जांच जरूरी
मामले में एक और गंभीर आरोप सामने आया है। उपलब्ध जानकारी और बताए गए साक्ष्यों के अनुसार डॉ. तरुण पटेल द्वारा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र छुरा में कथित तौर पर किसी अन्य डॉक्टर के नाम से बनी पर्ची पर मरीज को दवा लिखने और हस्ताक्षर करने की बात कही जा रही है। डॉ. पटेल की शैक्षणिक योग्यता BAMS बताई गई है। ऐसे में यदि किसी अन्य चिकित्सक के नाम से बनी पर्ची पर उनके द्वारा एलोपैथिक दवाएं लिखने और हस्ताक्षर करने की बात सही पाई जाती है, तो यह जांच का विषय है कि यह किस अधिकार, आदेश और चिकित्सकीय प्रोटोकॉल के तहत किया गया।
वहीं दूसरी ओर यह भी जांच का विषय है कि चिरायु कार्यक्रम के तहत बच्चों के स्वास्थ्य परीक्षण के लिए निर्धारित कर्मचारी की स्कूल भ्रमण वाली ड्यूटी के समय CHC में उपस्थिति किस व्यवस्था के तहत रही। क्या ड्यूटी चार्ट सिर्फ कागजों तक सीमित है, या वास्तव में उसका पालन हो रहा है? यह सवाल अब स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर भी उठ रहा है।
BMO बोले—जांच के बाद ही स्थिति होगी स्पष्ट
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र छुरा के ब्लॉक चिकित्सा अधिकारी राहुल नेताम का कहना है कि उनके सामने जो जानकारी रखी गई है, उसके आधार पर सभी बिंदुओं की जांच कराई जाएगी। जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि चिरायु टीम की ड्यूटी, संबंधित कर्मचारी की उपस्थिति और मरीज को दवा लिखने से जुड़े आरोपों में वास्तविक स्थिति क्या है।
अब सवाल यही है कि चिरायु जैसी बाल स्वास्थ्य योजना, जिसका सीधा संबंध स्कूली बच्चों के स्वास्थ्य से है, उसमें ड्यूटी चार्ट का पालन क्यों नहीं हो रहा है? क्या छुरा ब्लॉक में चिरायु टीमों की निगरानी पर्याप्त है? और यदि निर्धारित ड्यूटी के दौरान कर्मचारी अन्य स्थान पर पाए जाते हैं तो इसकी जवाबदेही किसकी होगी? जांच के बाद इन सवालों का जवाब सामने आने की उम्मीद है।
Author: थनेश्वर बंजारे
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