गरियाबंद में आदिवासी विकास विभाग कार्यालय पर कुर्की की नौबत, 9.71 लाख के मुआवजे ने बढ़ाई मुश्किल
मुआवजा नहीं दिया तो आदिवासी विकास विभाग कार्यालय की चल संपत्ति पर कुर्की की तलवार, कोर्ट अमला पहुंचते ही मचा हड़कंप; आपसी सहमति के बाद फिलहाल टली कार्रवाई
गरियाबंद। सड़क हादसे में मृतक के आश्रित परिवार को न्यायालय के आदेश के बावजूद मुआवजा राशि का भुगतान नहीं करना आदिवासी विकास विभाग, गरियाबंद के लिए भारी पड़ गया। करीब 9 लाख 71 हजार रुपये के मुआवजे की वसूली को लेकर न्यायालय ने विभाग की चल संपत्ति की कुर्की का वारंट जारी कर दिया। मंगलवार को न्यायालय का मचकुरी अमला पीड़ित परिवार और अधिवक्ताओं के साथ विभागीय कार्यालय पहुंचा तो अधिकारियों-कर्मचारियों में हड़कंप मच गया।
2022 के सड़क हादसे से जुड़ा है मामला
मामला वर्ष 2022 का बताया जा रहा है। आदिवासी विकास विभाग के एक वाहन की चपेट में आने से एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। हादसे के बाद मृतक के आश्रित परिवार ने न्यायालय की शरण ली। सुनवाई के बाद न्यायालय ने विभाग को पीड़ित परिवार को 9 लाख 71 हजार रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया था।
बताया जा रहा है कि न्यायालय के आदेश के बावजूद लंबे समय तक मुआवजा राशि का भुगतान नहीं किया गया। मुआवजे के लिए परिजन लगातार विभाग के चक्कर लगाते रहे, लेकिन राशि नहीं मिलने पर आखिरकार उन्हें दोबारा न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ा।
कुर्की वारंट लेकर सीधे कार्यालय पहुंचा कोर्ट अमला
मामले में न्यायालय ने सख्त रुख अपनाते हुए विभाग की चल संपत्ति की कुर्की के लिए वारंट जारी कर दिया। मंगलवार को न्यायालय का मचकुरी अमला पीड़ित परिवार और उनके अधिवक्ताओं के साथ आदिवासी विकास विभाग कार्यालय, गरियाबंद पहुंच गया।
कार्यालय में कुर्की की कार्रवाई की स्थिति बनते ही हड़कंप मच गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए विभागीय अधिकारी भी सक्रिय हो गए। बताया जा रहा है कि सहायक आयुक्त मामले को लेकर न्यायालय पहुंचे, जहां आगे की कार्रवाई को लेकर बातचीत हुई।
आपसी सहमति से फिलहाल टली कुर्की
सूत्रों के अनुसार, पीड़ित पक्ष और विभाग के बीच बातचीत के बाद आपसी सहमति बनी और विभाग को मुआवजा संबंधी प्रक्रिया पूरी करने के लिए कुछ दिनों का समय दिया गया है। इसी सहमति के चलते फिलहाल कुर्की की कार्रवाई रोक दी गई है।
हालांकि, यह राहत स्थायी नहीं मानी जा रही है। तय समय में यदि मुआवजा राशि का भुगतान नहीं हुआ या सहमति के अनुसार कार्रवाई नहीं हुई तो न्यायालय के आदेश के तहत दोबारा कुर्की की कार्रवाई शुरू होने की स्थिति बन सकती है।
अब सवाल—कब मिलेगा मृतक के परिवार को हक?
करीब चार साल पुराने इस मामले में मृतक के परिवार को न्यायालय द्वारा निर्धारित 9 लाख 71 हजार रुपये की राशि अब तक नहीं मिल पाने से विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। पीड़ित पक्ष का कहना है कि न्यायालय के आदेश के बाद भी मुआवजा पाने के लिए उन्हें लंबी कानूनी प्रक्रिया से गुजरना पड़ा।
फिलहाल आपसी सहमति के बाद कुर्की टल गई है और विभाग को कुछ दिनों की मोहलत मिली है। अब निगाह इस बात पर है कि क्या आदिवासी विकास विभाग तय समय में मुआवजा राशि का भुगतान कर पीड़ित परिवार को राहत देगा, या फिर न्यायालय की कुर्की की कार्रवाई दोबारा शुरू होगी।
Author: थनेश्वर बंजारे
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