फाइल मांगते-मांगते 13 दिन बीते, फर्जी शिक्षाकर्मियों की जांच अब भी सवालों में!

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फाइल मांगते-मांगते 13 दिन बीते, फर्जी शिक्षाकर्मियों की जांच अब भी सवालों में!

कलेक्टर ने 2 दिन में मांगी थी 2005-07 की नियुक्तियों की सूची

 अब बर्खास्त शिक्षाकर्मियों ने फिर उठाई जांच की मांग; एक सप्ताह में कार्रवाई नहीं हुई तो धरने की चेतावनी′

गरियाबंद/मैनपुर-:मैनपुर जनपद पंचायत में वर्ष 2007 में हुई शिक्षाकर्मी नियुक्तियों का मामला एक बार फिर गरमा गया है। 28 जुलाई को कलेक्टर बीएस उइके ने फर्जी दिव्यांग प्रमाण-पत्र और फर्जी दस्तावेजों के सहारे शिक्षाकर्मी बनने वालों की सूची दो दिवस में उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे। लेकिन 10 अगस्त को सामने आए नए पत्र ने जांच और कार्रवाई की प्रक्रिया पर फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।

कलेक्टर के निर्देश के मुताबिक संबंधित शिक्षाकर्मियों की सूची दो दिन में उपलब्ध होनी थी, ताकि फर्जी दस्तावेजों के सहारे नौकरी करने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सके। लेकिन अब 10 अगस्त 2026 को मैनपुर जनपद पंचायत के 103 बर्खास्त शिक्षाकर्मियों की ओर से कलेक्टर को पत्र देकर पूरे मामले में उचित कार्रवाई की मांग की गई है। उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर 28 जुलाई से 10 अगस्त तक 13 दिन बीत चुके हैं।

जिला जांच समिति के निष्कर्षों का हवाला

बर्खास्त शिक्षाकर्मियों की ओर से दिए गए पत्र में दावा किया गया है कि वर्ष 2007 में जनपद पंचायत मैनपुर में शिक्षाकर्मियों की नियुक्ति हुई थी। पत्र के अनुसार उस समय 103 शिक्षाकर्मियों को विभिन्न कारणों से अपात्र मानते हुए बर्खास्त किया गया था, जबकि वर्तमान में वर्ष 2007 में नियुक्त 129 शिक्षाकर्मियों को अभी भी अपात्र बताया गया है।

पत्र में जिला गरियाबंद की जांच समिति द्वारा प्रस्तुत विकलांग प्रमाण-पत्र, अनुभव प्रमाण-पत्र, खेलकूद एवं स्काउट गाइड प्रमाण-पत्रों को अपात्र मानने और नियुक्ति को कूटरचित बताए जाने का उल्लेख किया गया है। पत्र में यह भी कहा गया है कि इसके बावजूद संबंधित लोग लंबे समय से अपने पदों पर कार्यरत हैं।

20-21 साल से नौकरी का दावा, फिर जांच किस मोड़ पर

पत्र में बर्खास्त शिक्षाकर्मियों ने दावा किया है कि कुछ संबंधित शिक्षाकर्मी करीब 20-21 वर्षों से अपने पद पर कार्यरत हैं, जबकि उनके दस्तावेजों को लेकर पहले ही सवाल उठ चुके हैं। इसी आधार पर उन्होंने प्रशासन से उचित कार्रवाई की मांग की है।

यहां बड़ा सवाल यह है कि जब कलेक्टर ने 28 जुलाई को दो दिन में सूची मांगी थी, तो 10 अगस्त तक जांच किस स्तर पर पहुंची? क्या संबंधित फाइल और नियुक्ति दस्तावेजों की जांच पूरी हुई? यदि कार्रवाई शुरू हुई है तो किन-किन शिक्षाकर्मियों पर क्या कार्रवाई हुई? और यदि कार्रवाई नहीं हुई है तो इसकी वजह क्या है?

अब बर्खास्त शिक्षाकर्मियों ने फिर मांगी कार्रवाई

10 अगस्त को दिए गए पत्र में बर्खास्त शिक्षाकर्मियों ने प्रशासन से मामले पर कार्रवाई करने का आग्रह किया है। पत्र में चेतावनी दी गई है कि एक सप्ताह के भीतर कार्रवाई नहीं होने पर उनके द्वारा धरना-प्रदर्शन किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

अब निगाह प्रशासन की अगली कार्रवाई पर

एक ओर कलेक्टर द्वारा दो दिन में सूची मांगने का निर्देश और दूसरी ओर 10 अगस्त को बर्खास्त शिक्षाकर्मियों द्वारा फिर कार्रवाई की मांग—इन दोनों दस्तावेजों ने मैनपुर के शिक्षाकर्मी नियुक्ति मामले को फिर चर्चा में ला दिया है। अब देखना होगा कि प्रशासन संबंधित नियुक्तियों की फाइल कब तक सामने लाता है और जांच के बाद दोषी पाए जाने वालों पर वास्तव में क्या कार्रवाई होती है।

 

 

थनेश्वर बंजारे
Author: थनेश्वर बंजारे

Dist :- Gariyaband Phone No. :- 7067148964 Gmail :- Banjarethaneshwar544@gmail.com

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