शिक्षकों की कमी से प्रभावित हो रही बच्चों की पढ़ाई, शाला प्रबंधन समिति और पालकों ने जिला शिक्षा अधिकारी को सौंपा ज्ञापन; निलंबन की निष्पक्ष समीक्षा और शिक्षक को पुनः कोपरा में पदस्थ करने की मांग।
गरियाबंद-:फिंगेश्वर विकासखंड के शासकीय नवीन पूर्व माध्यमिक शाला कोपरा में शिक्षक जितेंद्र कुमार पारधी के निलंबन का मामला अब तूल पकड़ने लगा है। शिक्षक की वापसी की मांग को लेकर शाला प्रबंधन समिति, पालक और ग्रामीण एकजुट हो गए हैं। 4 नवंबर को जिला शिक्षा अधिकारी के नाम सौंपे गए ज्ञापन में निलंबन की निष्पक्ष समीक्षा, सेवा में बहाली और पुनः कोपरा स्कूल में पदस्थापना की मांग की गई है। समिति ने मांग पूरी नहीं होने पर विद्यालय में तालाबंदी की चेतावनी भी दी है।
समिति का कहना है कि विद्यालय पहले से ही शिक्षकों की कमी से जूझ रहा है। शिक्षिका धनकेश्वरी वर्मा के युक्तियुक्तकरण के तहत देवभोग स्थानांतरण के बाद तीन शिक्षकों ने आपसी सहयोग से अध्यापन व्यवस्था संभाली थी। इसके लिए प्रति शिक्षक एक हजार रुपये की व्यवस्था भी की गई थी। लेकिन शिक्षक जितेंद्र कुमार पारधी के निलंबन के बाद विद्यालय में केवल दो शिक्षक रह गए हैं, जिससे विशेषकर अंग्रेजी विषय की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
ज्ञापन में बताया गया है कि शिक्षक पारधी की आकस्मिक अस्वस्थता और अस्पताल जाने के कारण विद्यालय पहुंचने में विलंब हुआ था। इस संबंध में स्पष्टीकरण देने और भविष्य में ऐसी गलती नहीं दोहराने का आश्वासन देने के बावजूद पहले वेतन कटौती और फिर निलंबन की कार्रवाई किए जाने पर समिति ने सवाल उठाए हैं।
समिति ने पूर्व प्रधानपाठक धर्मेंद्र सिंह ठाकुर के विरुद्ध छात्राओं से संबंधित अनुचित स्पर्श एवं मारपीट की शिकायतों का भी उल्लेख किया है। ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि उक्त मामले में निलंबन के बजाय अन्य विद्यालय में व्यवस्था की गई और बाद में पदोन्नति भी हुई। समिति ने दोनों मामलों में विभागीय कार्रवाई के अलग-अलग पैमानों पर सवाल उठाते हुए निष्पक्षता और पारदर्शिता के साथ समीक्षा की मांग की है। हालांकि, इन शिकायतों और विभागीय कार्रवाई से जुड़े तथ्यों की स्वतंत्र पुष्टि किया जाना आवश्यक है।
शाला प्रबंधन समिति ने तीन प्रमुख मांगें रखी हैं। इनमें शिक्षक जितेंद्र कुमार पारधी के निलंबन की निष्पक्ष समीक्षा, निलंबन समाप्त कर सेवा में बहाली तथा उन्हें पुनः कोपरा विद्यालय में पदस्थ करने की मांग शामिल है। साथ ही पूर्व प्रधानपाठक से संबंधित शिकायतों की भी पारदर्शी जांच की मांग की गई है।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो पालक और ग्रामीण स्कूल में तालाबंदी करेंगे। जिला शिक्षा अधिकारी की अनुपस्थिति में ग्रामीणों ने सांख्यिकी अधिकारी श्याम चंद्राकर को ज्ञापन सौंपा। उन्होंने शीघ्र व्यवस्था बहाल करने का आश्वासन दिया है।
अब पूरा मामला शिक्षा विभाग के अगले कदम पर निर्भर है। एक ओर विभागीय कार्रवाई को लेकर सवाल उठ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर शिक्षकों की कमी का सीधा असर विद्यार्थियों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। ऐसे में सवाल यह है कि विभाग शिक्षक निलंबन के मामले की समीक्षा और विद्यालय में पर्याप्त शिक्षकों की व्यवस्था कब तक करेगा?
Author: थनेश्वर बंजारे
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