80 साल पुराना बसेरा छोड़ने को तैयार 156 परिवार, मगर ग्रामीणों की दो टूक—“पहले हक तय करो, फिर विस्थापन करो!”

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80 साल पुराना बसेरा छोड़ने को तैयार 156 परिवार, मगर ग्रामीणों की दो टूक—“पहले हक तय करो, फिर विस्थापन करो!”

1945 से देवझर-अमली में बसे हैं ग्रामीण | 550 से ज्यादा आबादी ने जताई स्वैच्छिक विस्थापन की सहमति | 15 लाख या 5 एकड़ जमीन-मकान का विकल्प स्पष्ट करने की मांग | 18 साल के युवक-युवतियों को अलग यूनिट का लाभ देने की मांग

गरियाबंद /मैनपुर-: उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व क्षेत्र के देवझर-अमली गांव के ग्रामीणों ने स्वैच्छिक विस्थापन के लिए अपनी सहमति जरूर दे दी है, लेकिन 80 साल पुराने अपने बसेरे को छोड़ने से पहले ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन के सामने अपनी शर्तें साफ कर दी हैं। वर्ष 1945 में बसे इस गांव के 156 परिवार और 550 से अधिक ग्रामीण चाहते हैं कि पहले पुनर्वास के सभी अधिकार और सुविधाएं ग्राम सभा में लिखित रूप से तय हों, उसके बाद ही विस्थापन की प्रक्रिया आगे बढ़े।

ग्रामीणों का कहना है कि वे करीब आठ दशक से इसी गांव में पीढ़ी-दर-पीढ़ी रह रहे हैं। उनकी जमीन, खेत, घर और जीवन की यादें इसी गांव से जुड़ी हैं। ऐसे में गांव छोड़ना उनके लिए सिर्फ जगह बदलना नहीं, बल्कि पुश्तैनी बसेरे से विदाई है। इसलिए वे चाहते हैं कि सरकार उन्हें ऐसा पुनर्वास दे, जहां उनके परिवार सम्मानपूर्वक अपना नया जीवन शुरू कर सकें।

“विस्थापन मंजूर है, लेकिन अधिकारों से समझौता नहीं”

ग्राम सभा में ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से स्वैच्छिक विस्थापन के पक्ष में सहमति जताते हुए वन विभाग को आवेदन सौंपा है। ग्रामीणों की सबसे बड़ी मांग है कि विस्थापन से पहले ग्राम सभा में पुनर्वास की पूरी शर्तें तय हों और उन्हें आधिकारिक प्रस्ताव में दर्ज किया जाए।

ग्रामीणों ने पुनर्वास स्थल पर सड़क, पुल-पुलिया, बिजली, पेयजल, स्कूल, आंगनबाड़ी और अन्य मूलभूत सुविधाओं की लिखित गारंटी की मांग की है।

15 लाख रुपए या आवास के साथ 5 एकड़ जमीन—पैकेज स्पष्ट करने की मांग

ग्रामीणों के अनुसार स्वैच्छिक विस्थापन के तहत पात्र परिवारों को 15 लाख रुपए अथवा आवास के साथ 5 एकड़ कृषि भूमि दिए जाने की बात बताई गई है। ग्रामीण चाहते हैं कि कौन पात्र होगा, किसे कितना लाभ मिलेगा और पुनर्वास की पूरी प्रक्रिया क्या होगी—यह सब ग्राम सभा के प्रस्ताव में स्पष्ट रूप से दर्ज किया जाए।

18 साल की उम्र पूरी करने वालों को अलग यूनिट मिले

ग्रामीणों ने मांग रखी है कि परिवार में 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुके युवक-युवतियों को भी अलग पुनर्वास यूनिट माना जाए। उन्हें भी पात्रता के अनुसार 5 एकड़ कृषि भूमि और 15 लाख रुपए का लाभ दिया जाए। इसके साथ ही विधवा, परित्यक्ता, दिव्यांग और अनाथ व्यक्तियों को भी नियमानुसार अलग यूनिट का लाभ देने की मांग की गई है।

दादा-पिता के जमाने से सुनते आ रहे विस्थापन की चर्चा

ग्रामीण पुस्तम सिंह मांझी का कहना है कि विस्थापन की चर्चा वे अपने दादा और पिता के समय से सुनते आ रहे हैं। पहले भी पुनर्वास और खेत-खार को लेकर प्रक्रिया आगे बढ़ी थी, लेकिन बाद में मामला रुक गया। अब ग्रामीण स्वेच्छा से विस्थापन के लिए तैयार हैं, मगर इस बार वे चाहते हैं कि हर अधिकार पहले तय और लिखित हो।

ग्राम सभा की निगरानी में हो पुनर्वास

ग्रामीणों ने पुनर्वास प्रक्रिया की निगरानी समिति में ग्राम सभा के प्रतिनिधियों को शामिल करने की मांग की है। उनका कहना है कि नए गांव में मकान निर्माण और विकास कार्यों की निगरानी में ग्रामीणों की भागीदारी होनी चाहिए, ताकि किसी भी प्रकार की अनियमितता या भ्रष्टाचार की गुंजाइश न रहे।

ग्रामीणों की दो टूक

“हम अपना 80 साल पुराना बसेरा छोड़ने को तैयार हैं, लेकिन अपना हक छोड़ने को तैयार नहीं। पहले पुनर्वास की शर्तें ग्राम सभा में तय हों, हर परिवार की पात्रता स्पष्ट हो और मूलभूत सुविधाओं की लिखित गारंटी मिले—इसके बाद ही विस्थापन की प्रक्रिया आगे बढ़े।”

थनेश्वर बंजारे
Author: थनेश्वर बंजारे

Dist :- Gariyaband Phone No. :- 7067148964 Gmail :- Banjarethaneshwar544@gmail.com

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