सुखा नदी में अवैध रेत खनन का खेल बेनकाब, दो चैन माउंटेन जब्त
मंत्री-कलेक्टर के सख्त निर्देश के बावजूद कई दिनों से चल रहा था खेल! सवाल—प्रशासन की नजर से कैसे बचता रहा अवैध उत्खनन?
राजिम/छुरा-:विकासखंड छुरा के अंतिम छोर पर स्थित ग्राम पंचायत सोरिद के आश्रित ग्राम नागंझर में सुखा नदी से कथित अवैध रेत उत्खनन, परिवहन और डंपिंग का मामला सामने आने के बाद खनिज विभाग की टीम ने बड़ी कार्रवाई की है। मौके पर पहुंची खनिज, राजस्व और फिंगेश्वर थाना क्षेत्र की संयुक्त टीम ने रेत खनन में इस्तेमाल की जा रही दो चैन माउंटेन मशीनों को जब्त कर लिया। कार्रवाई के बाद अवैध रेत कारोबार से जुड़े लोगों में हड़कंप मचा हुआ है।
बताया जा रहा है कि नागंझर क्षेत्र में पिछले कई दिनों से नदी से रेत निकालने, उसका परिवहन करने और अलग-अलग स्थानों पर अवैध रूप से डंप करने का कारोबार चल रहा था। स्थानीय स्तर पर इसकी जानकारी होने के बावजूद कार्रवाई कब होगी, इसे लेकर सवाल उठते रहे। आखिरकार सूचना मिलने के बाद विभागीय टीम मौके पर पहुंची और मशीनों को जब्त किया।
मंत्री-कलेक्टर के निर्देश के बाद भी सवालों के घेरे में निगरानी
गौर करने वाली बात यह है कि कुछ दिन पहले ही जिले के प्रभारी मंत्री दयालदास बघेल और कलेक्टर ने जिले में अवैध रेत उत्खनन, अवैध परिवहन और डंपिंग के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए थे। ऐसे में सवाल यह है कि यदि नागंझर में कई दिनों से रेत का अवैध कारोबार चल रहा था तो इसकी भनक जिम्मेदार विभाग को पहले क्यों नहीं लगी?
क्या जिला प्रशासन और खनिज विभाग को इसकी जानकारी नहीं थी?
या फिर विभाग किसी शिकायत का इंतजार कर रहा था?
क्या नदी से लगातार रेत निकालने वाली मशीनें विभागीय निगरानी से बचकर काम करती रहीं?
इन सवालों का जवाब अब कार्रवाई से ज्यादा निगरानी व्यवस्था से जुड़ा हुआ है।
शिकायत के बाद ही कार्रवाई क्यों?
अवैध रेत उत्खनन के खिलाफ कार्रवाई होना निश्चित रूप से स्वागत योग्य है, लेकिन सवाल यह भी है कि क्या खनिज विभाग की टीम नियमित रूप से नदी घाटों की निगरानी कर रही है? यदि विभाग लगातार क्षेत्र में गश्त और निरीक्षण करता है तो फिर कई दिनों से चल रहे कथित अवैध उत्खनन का पता शिकायत मिलने के बाद ही क्यों चला?
स्थानीय लोगों का कहना है कि नदी से रेत निकाले जाने और डंप किए जाने की गतिविधियां लगातार चल रही थीं। ऐसे में अब यह भी जांच का विषय है कि इस कारोबार में कौन-कौन लोग शामिल हैं, मशीनें किसकी हैं, रेत कहां ले जाई जा रही थी और कितनी मात्रा में उत्खनन किया गया।
जानकारी के अनुसार आरंग और भिलाई क्षेत्र से जुड़े कुछ लोगों के साथ स्थानीय लोगों की संलिप्तता की बात भी सामने आ रही है। हालांकि, किसकी भूमिका है और किसके संरक्षण में यह कारोबार चल रहा था, यह विभागीय जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।
खनिज अधिकारी अर्चना ठाकुर ने बताया कि विभाग द्वारा पहले भी क्षेत्र में कार्रवाई की गई है। सूचना मिलते ही टीम मौके पर पहुंची और दो चैन माउंटेन मशीनों को अपने कब्जे में लिया गया है। आगे नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है।
अब असली सवाल कार्रवाई के बाद की कार्रवाई का
दो मशीनों की जब्ती के बाद मामला सिर्फ कार्रवाई तक सीमित नहीं रहना चाहिए। प्रशासन को यह भी स्पष्ट करना होगा कि अवैध रूप से कितनी रेत निकाली गई, कितने वाहनों से उसका परिवहन हुआ, कहां-कहां डंपिंग की गई और इस पूरे खेल से जुड़े लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाएगी।
सवाल यह भी है कि क्या खनिज विभाग आगे भी इसी तरह शिकायत मिलने का इंतजार करेगा या जिले की प्रमुख रेत घाटों पर नियमित निगरानी बढ़ाई जाएगी?
मंत्री और कलेक्टर के निर्देश के बाद अब देखना होगा कि प्रशासन की कार्रवाई सिर्फ मशीन जब्ती तक सीमित रहती है या अवैध रेत कारोबार की जड़ तक पहुंचकर जिम्मेदार लोगों पर भी ठोस कार्रवाई होती है।
Author: थनेश्वर बंजारे
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