बनारस की झलक विदेश में, कलाकारों की तारीफ करते दिखे प्रधानमंत्री

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नई दिल्ली  । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मध्य यूरोपीय देश स्लोवाकिया की अपनी दो दिवसीय ऐतिहासिक और अत्यंत सफल आधिकारिक यात्रा पूरी कर ली है। साल 1993 में चेकोस्लोवाकिया के विभाजन और स्वतंत्र स्लोवाकिया राष्ट्र के गठन के बाद पिछले 33 वर्षों में किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री का यह पहला स्लोवाकिया दौरा था। इस मील के पत्थर साबित होने वाले दौरे के दौरान दोनों देशों ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को एक नया आयाम देते हुए इसे ‘व्यापक साझेदारी’ (Strategic Comprehensive Partnership) का दर्जा दिया है।

‘ब्रातिस्लावा में बनारस’: जब वैश्विक मंच पर दिखी काशी की छटा

इस ऐतिहासिक यात्रा का सबसे अनूठा और भावनात्मक पहलू तब सामने आया जब प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पहले ट्विटर) पर अपने एक बेहद खास अनुभव को साझा करते हुए इसे ‘ब्रातिस्लावा में बनारस का जुड़ाव’ करार दिया।दरअसल, स्लोवाकिया के राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति पीटर पेलेग्रिनी और पीएम मोदी ने संयुक्त रूप से वाराणसी (काशी) की सांस्कृतिक विरासत पर आधारित एक विशेष चित्रकला प्रदर्शनी का अवलोकन किया। इस प्रदर्शनी की खास बातें निम्नलिखित हैं:यूरोपीय कलाकारों की नजर से काशी: इस प्रदर्शनी में उन स्लोवाक चित्रकारों और कलाकारों की उत्कृष्ट कृतियों को प्रदर्शित किया गया था, जिन्होंने हाल ही में भारत के प्राचीन शहर वाराणसी का दौरा किया था।सांस्कृतिक पुल: स्लोवाक कलाकारों ने कैनवास पर बनारस के घाटों, गंगा आरती और वहां की आध्यात्मिक जीवंतता को उकेरा, जिसे देखकर पीएम मोदी भावविभोर हो गए।पीएम का संदेश: प्रधानमंत्री ने कलाकारों को बधाई देते हुए लिखा, “कला और संस्कृति में दुनिया के दो अलग-अलग छोर पर बैठे लोगों को एक-दूसरे के करीब लाने की अद्भुत और जादुई क्षमता होती है।

आतंकवाद पर प्रहार, शिक्षा और रोजगार पर बड़े समझौते

सांस्कृतिक आदान-प्रदान के साथ-साथ यह यात्रा भू-राजनीतिक और आर्थिक मोर्चे पर भी बेहद रणनीतिक रही। पीएम मोदी और स्लोवाक नेतृत्व के बीच हुई उच्च स्तरीय द्विपक्षीय वार्ता में कई महत्वपूर्ण समझौतों पर मुहर लगी

थनेश्वर बंजारे
Author: थनेश्वर बंजारे

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