मानसून के बीच बढ़ेगा संकट: 70 करोड़ लोग झेल सकते हैं मुश्किल हालात

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नई दिल्ली   । जलवायु परिवर्तन के गंभीर प्रभावों के चलते भारत में भविष्य का मानसून भी अब गर्मियों की तपती लू (Heat Wave) जितना ही जानलेवा साबित हो सकता है। आईआईटी गांधीनगर (IIT Gandhinagar) के नेतृत्व में किए गए एक हालिया शोध से यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, यदि वैश्विक तापमान औद्योगिक काल से पहले के स्तर की तुलना में 2 डिग्री सेल्सियस बढ़ जाता है, तो देश का लगभग 53 प्रतिशत हिस्सा मानसून के महीनों में ऐसी भीषण गर्मी और उमस (Humidity) की चपेट में आ जाएगा, जहाँ इंसान का शरीर पसीने के माध्यम से भी खुद को ठंडा नहीं रख पाएगा।

क्या है ‘अनकम्पेन्सेबल हीट स्ट्रेस’ और इसके खतरे?

इस अध्ययन में वैज्ञानिकों ने जिस सबसे खतरनाक स्थिति की ओर इशारा किया है, उसे वैज्ञानिक भाषा में अनकम्पेन्सेबल हीट स्ट्रेस (Uncompensable Heat Stress) कहा जाता है। असर: यह एक ऐसी स्थिति है जब वायुमंडल में तापमान और नमी (उमस) का ग्राफ इतना ऊपर चला जाता है कि इंसान के शरीर की नेचुरल कूलिंग सिस्टम (प्राकृतिक शीतलन प्रणाली) पूरी तरह फेल हो जाती है। नतीजा: सामान्यतः हमारा शरीर तापमान को संतुलित करने के लिए पसीना बहाता है, लेकिन अत्यधिक उमस के कारण पसीना सूख नहीं पाता। ऐसे में शरीर के अंदरूनी अंग उबलने लगते हैं।

थनेश्वर बंजारे
Author: थनेश्वर बंजारे

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