1.35 करोड़ की शेष राशि और 63 लाख की कथित निकासी पर सवाल, क्या जनदर्शन की शिकायत भी ठंडे बस्ते में जाएगी?

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फिंगेश्वर बीईओ कार्यालय के एरियर्स मामले में जिला प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी निगाहें, नए कलेक्टर रणबीर शर्मा से निष्पक्ष जांच और जवाबदेही की उम्मीद

 

थानेश्वर बंजारे

 

गरियाबंद/फिंगेश्वर-: सरकारी राशि के हिसाब-किताब से जुड़ा एक गंभीर सवाल फिर प्रशासन के सामने है। सर्व शिक्षा अभियान (SSA) के तहत शिक्षक पंचायत संवर्ग के एरियर्स भुगतान के लिए आवंटित राशि में से लगभग 1.35 करोड़ रुपये की शेष रकम और वर्ष 2018 से 2025 के बीच करीब 63 लाख रुपये की कथित निकासी को लेकर कलेक्टर जनदर्शन में शिकायत प्रस्तुत की गई है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या जिला प्रशासन इस मामले में निष्पक्ष जांच कराएगा, जिम्मेदारों की जवाबदेही तय करेगा या फिर यह शिकायत भी सरकारी फाइलों में दबकर रह जाएगी?

 

शिकायतकर्ता ने 6 अक्टूबर 2026 को कलेक्टर जनदर्शन में आवेदन प्रस्तुत कर मामले की विस्तृत वित्तीय जांच की मांग की है। शिकायत का जनदर्शन टोकन क्रमांक 2190126001920 और सुरक्षा क्रमांक 257 है। मामला फिंगेश्वर विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय से संबंधित है, जहां एरियर्स भुगतान के लिए आवंटित राशि के रखरखाव, कथित निकासी, बैंक ब्याज और शेष रकम के समायोजन को लेकर सवाल उठाए गए हैं।

 

योजना बंद हुई, संविलियन हुआ, फिर खातों में क्यों पड़ी रही सरकारी राशि?

 

शिकायत के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2015-16 एवं 2016-17 में शिक्षक पंचायत संवर्ग के एरियर्स भुगतान के लिए सर्व शिक्षा अभियान के अंतर्गत राशि आवंटित की गई थी। 1 जुलाई 2018 को शिक्षक पंचायत संवर्ग के स्कूल शिक्षा विभाग में संविलियन के बाद भी लगभग 1.35 करोड़ रुपये की शेष राशि संबंधित बैंक खातों में बने रहने का दावा किया गया है।

 

सवाल यह है कि जब राशि एक निर्धारित उद्देश्य के लिए आवंटित हुई थी, तो भुगतान के बाद बची रकम का नियमानुसार समायोजन या हस्तांतरण समय पर क्यों नहीं हुआ? क्या संबंधित अधिकारियों ने इस राशि की स्थिति की समीक्षा की? यदि की, तो उसके दस्तावेज कहां हैं? और यदि राशि वर्षों तक खातों में बनी रही, तो इसके पीछे क्या प्रशासनिक कारण थे?

 

इन सवालों का जवाब केवल विभागीय स्पष्टीकरण से नहीं, बल्कि बैंक स्टेटमेंट, कैशबुक, लेजर, भुगतान वाउचर और संबंधित आदेशों की जांच से ही सामने आ सकता है।

 

2021 में निर्देश जारी होने के बाद भी क्या हुआ?

 

शिकायत में जिला परियोजना कार्यालय समग्र शिक्षा, गरियाबंद के आदेश क्रमांक 664/एस.एस./लेखा/2021-22, दिनांक 24 दिसंबर 2021 का भी उल्लेख किया गया है। शिकायतकर्ता के अनुसार, इस आदेश में एरियर्स भुगतान के बाद बची राशि के हस्तांतरण के लिए विकासखंड शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए गए थे।

 

यदि ऐसा निर्देश जारी हुआ था, तो उसका पालन किस स्तर तक हुआ? क्या फिंगेश्वर बीईओ कार्यालय ने समय पर कार्रवाई की? यदि राशि हस्तांतरित नहीं हुई, तो इसके लिए कौन जिम्मेदार था? इन सवालों पर जिला प्रशासन की स्पष्टता जरूरी है।

 

63 लाख रुपये की कथित निकासी, ब्याज का हिसाब कौन देगा?

 

शिकायत में वर्ष 2018 से 2025 के बीच लगभग 63 लाख रुपये विभिन्न किस्तों में निकाले जाने का आरोप लगाया गया है। हालांकि, इस आंकड़े और निकासी के उद्देश्य की स्वतंत्र पुष्टि अभी संबंधित बैंक अभिलेखों तथा वित्तीय दस्तावेजों की जांच से होनी बाकी है।

 

यही कारण है कि मामले में विशेष वित्तीय ऑडिट की मांग की गई है। जांच में यह स्पष्ट होना चाहिए कि राशि किस प्रयोजन से निकाली गई, किस अधिकारी ने भुगतान की स्वीकृति दी, धनराशि किन मदों में खर्च हुई और क्या प्रत्येक भुगतान के समर्थन में वैध दस्तावेज उपलब्ध हैं।

 

साथ ही, संबंधित बैंक खातों में जमा राशि पर अर्जित ब्याज की गणना भी जरूरी है। आखिर वर्षों तक सरकारी धन खातों में रहा, तो उससे कितना ब्याज मिला? उस ब्याज का लेखांकन कहां हुआ? क्या राशि और ब्याज का नियमानुसार समायोजन किया गया? इन प्रश्नों का जवाब सार्वजनिक होना चाहिए।

 

जनदर्शन में शिकायत के बाद अब जिला प्रशासन क्या करेगा?

 

यह मामला अब केवल एक शिकायत का नहीं, बल्कि सरकारी धन के प्रबंधन और प्रशासनिक जवाबदेही का सवाल बन गया है। शिकायत मिलने के बाद जिला प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वह अभिलेखों के आधार पर तथ्यों की जांच कराए और शिकायतकर्ता को नियमानुसार कार्रवाई की स्थिति से अवगत कराए।

 

लेकिन बड़ा सवाल यही है कि क्या जनदर्शन में आवेदन देने से मामले की वास्तविक जांच शुरू होगी? क्या संबंधित विभाग से रिकॉर्ड तलब किए जाएंगे? क्या स्वतंत्र वित्तीय ऑडिट कराया जाएगा? या फिर शिकायत को संबंधित कार्यालय भेजकर औपचारिक प्रक्रिया तक सीमित कर दिया जाएगा?

 

फिलहाल उपलब्ध शिकायत विवरण से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि जिला प्रशासन ने जानबूझकर किसी अधिकारी को बचाया है। न ही वित्तीय अनियमितता अभी प्रमाणित हुई है। लेकिन शिकायत में उठाए गए सवालों की गंभीरता को देखते हुए जांच की स्थिति और प्रशासनिक कार्रवाई स्पष्ट करना जरूरी है।

 

नए कलेक्टर रणबीर शर्मा से उम्मीदें, पुराने सवालों का मिलेगा जवाब?

 

गरियाबंद जिले में नए कलेक्टर रणबीर शर्मा से अब यह उम्मीद की जा रही है कि वे इस मामले को केवल एक आवेदन मानकर औपचारिक कार्रवाई तक सीमित नहीं रखेंगे, बल्कि संबंधित रिकॉर्ड की जांच कराकर वास्तविक स्थिति सामने लाने की पहल करेंगे।

 

सरकारी योजनाओं की राशि जनता के हित में खर्च होने के लिए आवंटित की जाती है। ऐसे में राशि का हिसाब स्पष्ट होना और बची हुई रकम का नियमानुसार समायोजन सुनिश्चित करना प्रशासनिक जिम्मेदारी है। यदि सब कुछ नियमों के अनुरूप हुआ है, तो जांच से संबंधित अधिकारियों को भी तथ्यात्मक स्थिति स्पष्ट करने का अवसर मिलेगा। वहीं, यदि जांच में अनियमितता सामने आती है, तो जिम्मेदारी तय कर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

 

अब निगाहें कलेक्टर जनदर्शन की अगली कार्रवाई पर हैं। क्या 1.35 करोड़ रुपये की शेष राशि, 63 लाख रुपये की कथित निकासी और बैंक ब्याज का पूरा हिसाब सामने आएगा? क्या वर्ष 2021 के निर्देशों के अनुपालन की समीक्षा होगी? और सबसे अहम, क्या इस बार शिकायत ठंडे बस्ते में जाने के बजाय जांच और जवाबदेही तक पहुंचेगी?

 

इन सवालों का जवाब जिला प्रशासन की कार्रवाई से ही मिलेगा।

थनेश्वर बंजारे
Author: थनेश्वर बंजारे

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