गरियाबंद के शिक्षा विभाग में CPS कटौती पर बड़ा सवाल! शिक्षकों के वेतन से करोड़ों की राशि का हिसाब संदिग्ध, उच्चस्तरीय जांच की मांग
देवभोग और मैनपुर विकासखंड के सैकड़ों शिक्षकों से जुड़ा मामला, वर्ष 2012 से संविलियन पूर्व की कटौती के अभिलेखों के सत्यापन की उठी मांग; अधिवक्ता कन्हैया मांझी ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र
गरियाबंद-:जिले के शिक्षा विभाग में शिक्षकों के वेतन से काटी गई CPS (कंट्रीब्यूटरी पेंशन स्कीम) की राशि और संबंधित खातों में जमा रकम के बीच कथित विसंगतियों का मामला सामने आया है। देवभोग एवं मैनपुर विकासखंड में संविलियन पूर्व अवधि के दौरान शिक्षक एलबी संवर्ग के कर्मचारियों के वेतन से की गई CPS कटौती के रिकॉर्ड और खातों में जमा राशि का मिलान कराने की मांग की गई है। मामले में लगभग 3 करोड़ रुपये की राशि के लेखा-जोखा में गंभीर विसंगति अथवा अनियमितता की आशंका जताते हुए स्वतंत्र जांच और वित्तीय ऑडिट की मांग की गई है।
इस संबंध में अधिवक्ता कन्हैया मांझी, निवासी ग्राम गिरसुल, तहसील देवभोग, जिला गरियाबंद ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने का अनुरोध किया है। पत्र में कहा गया है कि उपलब्ध जानकारी एवं सूचना के अधिकार के तहत मिले जवाबों के आधार पर शिक्षकों के वेतन से काटी गई राशि और उनके CPS/NPS खातों में जमा रकम का कर्मचारीवार सत्यापन आवश्यक है। हालांकि, राशि के गबन या वित्तीय अनियमितता की आशंका को लेकर लगाए गए आरोपों की अभी स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।
अलग-अलग शिक्षकों की कटौती अवधि में भारी अंतर का दावा
शिकायत में सबसे गंभीर सवाल यह उठाया गया है कि सभी शिक्षकों के वेतन से समान अवधि की CPS कटौती नहीं हुई। कुछ कर्मचारियों के मामले में 12 माह, कुछ में 24 माह, कुछ में 36 माह और कुछ में 42 माह तक की कटौती राशि के रिकॉर्ड में अंतर होने की बात कही गई है। ऐसे में यह स्पष्ट होना जरूरी है कि प्रत्येक शिक्षक के वेतन से वास्तविक रूप से कितनी राशि काटी गई और संबंधित CPS/NPS खाते में कितनी रकम जमा की गई।
पत्र के अनुसार, यह मामला केवल किसी एक पद या संवर्ग तक सीमित नहीं है, बल्कि सहायक शिक्षक एलबी, शिक्षक एलबी और व्याख्याता एलबी संवर्ग के कर्मचारियों से संबंधित बताया गया है। शिकायतकर्ता ने सभी प्रभावित कर्मचारियों का कर्मचारीवार और माहवार विवरण तैयार कराकर वास्तविक कटौती तथा जमा राशि का मिलान कराने की मांग की है।
RTI के जवाब ने बढ़ाए सवाल, अभिलेखों की प्रमाणित प्रतियां देने में असमर्थता
शिकायतकर्ता के अनुसार, सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत प्राप्त जानकारी में जिला पंचायत गरियाबंद की ओर से बताया गया कि मैनपुर विकासखंड में शिक्षक पंचायत संवर्ग की अप्रैल 2012 से मार्च 2016 तक की कटौती विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय द्वारा की जाती थी। वहीं, अप्रैल 2016 से 2018 तक की कटौती मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत द्वारा किए जाने का उल्लेख किया गया है।
पत्र में देवभोग विकासखंड के कर्मचारियों की CPS कटौती और जमा राशि के भी पूर्ण अभिलेखीय सत्यापन की आवश्यकता बताई गई है। शिकायतकर्ता का दावा है कि RTI के जवाब में संबंधित कर्मचारियों के CPS/NPS खातों में जमा राशि का कर्मचारीवार विवरण, कैशबुक और पासबुक की प्रमाणित प्रतियां उपलब्ध कराने में असमर्थता जताई गई। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब कर्मचारियों के वेतन से नियमित रूप से कटौती की गई, तो उसकी पूरी वित्तीय प्रविष्टियों और जमा राशि का प्रमाणित रिकॉर्ड कहां है?
वेतन पंजी से बैंक चालान तक जांच की मांग
अधिवक्ता ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि वर्ष 2012 से संविलियन तक की संबंधित अवधि के सभी वित्तीय अभिलेखों का स्वतंत्र रूप से परीक्षण कराया जाए। इसके लिए वेतन देयक, वेतन पंजी, CPS कटौती रजिस्टर, कैशबुक, लेजर, बैंक स्टेटमेंट, बैंक चालान, जमा रसीद तथा CPS/NPS खातों से जुड़े दस्तावेजों की जांच कराने का अनुरोध किया गया है।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि जांच किसी स्थानीय स्तर के अधिकारी तक सीमित न रखकर वरिष्ठ एवं स्वतंत्र जांच दल से कराई जाए, ताकि वास्तविक तथ्य निष्पक्ष रूप से सामने आ सकें। प्रत्येक शिक्षक के वेतन से काटी गई राशि और खाते में जमा राशि का माहवार मिलान कर यह निर्धारित किया जाए कि कितनी रकम किस अवधि में, किस कार्यालय और किस अधिकारी या कर्मचारी के माध्यम से काटी गई तथा संबंधित खाते में जमा हुई।
गड़बड़ी प्रमाणित हुई तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग
पत्र में मांग की गई है कि यदि जांच में सरकारी राशि के दुरुपयोग, वित्तीय अनियमितता अथवा किसी प्रकार की हेराफेरी की पुष्टि होती है, तो जिम्मेदार अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध नियमानुसार विभागीय और आवश्यक होने पर आपराधिक कार्रवाई की जाए। साथ ही, संबंधित शिक्षकों की कटौती राशि का नियमानुसार निराकरण सुनिश्चित किया जाए।
शिकायतकर्ता ने जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट और की गई कार्रवाई की जानकारी संबंधित शिक्षक कर्मचारियों एवं आवेदक को उपलब्ध कराने का भी अनुरोध किया है।
अब जिला प्रशासन की भूमिका पर निगाहें
शिक्षकों की पेंशन से जुड़ी राशि का मामला सीधे उनके आर्थिक भविष्य और सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाले लाभों से जुड़ा है। ऐसे में लगभग 3 करोड़ रुपये की कथित विसंगति को लेकर उठाए गए सवालों का दस्तावेजों के आधार पर समाधान जरूरी है। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग इस शिकायत पर क्या कदम उठाते हैं तथा देवभोग एवं मैनपुर विकासखंड के संबंधित शिक्षकों की CPS कटौती और जमा राशि का पूरा हिसाब कब तक सामने आता है।
सबसे अहम सवाल यही है—शिक्षकों के वेतन से काटी गई प्रत्येक राशि का हिसाब उपलब्ध है या नहीं? यदि रिकॉर्ड में कोई अंतर है, तो उसका कारण और जिम्मेदारी स्पष्ट करना विभाग की जवाबदेही है। निष्पक्ष जांच से ही शिक्षकों के संदेह दूर होंगे और वास्तविक स्थिति सामने आ सकेगी।
Author: थनेश्वर बंजारे
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