फर्जी दस्तावेजों से शिक्षाकर्मी की नौकरी का मामला: कार्रवाई नहीं हुई तो हाईकोर्ट जाएंगे शिकायतकर्ता, नए कलेक्टर रणबीर शर्मा से न्याय की उम्मीद
30 जुलाई के सरकारी पत्र में सुनवाई के बाद कार्रवाई प्रस्तावित, लेकिन अब तक अंतिम कार्रवाई पर सवाल; शिकायतकर्ता बोले—बार-बार विभागीय चक्कर लगाने के बजाय अब हाईकोर्ट में याचिका दायर करने की तैयारी
गरियाबंद/मैनपुर-: मैनपुर जनपद पंचायत में वर्ष 2005 से 2007 के बीच शिक्षाकर्मी वर्ग-03 के पदों पर नियुक्तियों में कथित फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। शिकायत, जांच समिति के गठन और कार्रवाई प्रस्तावित किए जाने के बावजूद अंतिम कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट नहीं होने से शिकायतकर्ता ने अब हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने की तैयारी शुरू कर दी है। शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि जिला प्रशासन इस मामले में ठोस कदम नहीं उठाता है, तो वे न्यायालय में याचिका दायर करेंगे।
इस मामले में जिला शिक्षा अधिकारी, गरियाबंद के कार्यालय से 30 जुलाई 2026 को जारी पत्र महत्वपूर्ण है। पत्र क्रमांक 4059/जि.शि.अ./स्था.03/सीपीग्राम्स/2026-27 में भारत सरकार के शिकायत पोर्टल पर दर्ज शिकायत क्रमांक PMOPG/D/2025/0175187 का उल्लेख करते हुए नियुक्तियों से संबंधित दस्तावेजों की जांच और आगे की कार्रवाई का विवरण दिया गया है।
पत्र के अनुसार, वर्ष 2005 से 2007 के बीच शिक्षाकर्मी वर्ग-03 के पदों पर चयनित अभ्यर्थियों के कथित फर्जी विकलांगता प्रमाणपत्रों और अन्य दस्तावेजों के आधार पर नियुक्तियों को निरस्त करने तथा आपराधिक प्रकरण दर्ज करने की मांग की गई थी। इस संबंध में कलेक्टर और जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी के आदेशों से जांच समिति गठित की गई थी। जांच प्रतिवेदन भी संबंधित अधिकारियों को भेजा गया।
112 अभ्यर्थियों से संबंधित दस्तावेजों की जांच का उल्लेख
जिला शिक्षा अधिकारी के 30 जुलाई 2026 के पत्र में चार श्रेणियों में कुल 112 कर्मचारियों के दस्तावेजों की स्थिति बताई गई है। इनमें 11 कर्मचारियों के डी.एड./बी.एड. प्रमाणपत्र, 11 के निःशक्तता प्रमाणपत्र, 28 के स्काउट-गाइड, खेलकूद, अनुभव एवं अन्य प्रमाणपत्रों के सत्यापन की बात कही गई है। वहीं 62 कर्मचारियों के संबंध में स्काउट-गाइड एवं खेलकूद प्रमाणपत्र प्रस्तुत नहीं करने का उल्लेख है।
पत्र के अंतिम हिस्से में संबंधित अभ्यर्थियों को सुनवाई का अवसर देते हुए कार्रवाई किए जाने का प्रस्ताव दर्ज है।
शिकायतकर्ता का आरोप—बार-बार विभागीय प्रक्रिया में उलझाया जा रहा मामला
शिकायतकर्ता का कहना है कि मामले को लेकर लंबे समय से अधिकारियों के समक्ष शिकायत और कार्रवाई की मांग की जा रही है। जांच और पत्राचार के बावजूद यदि अंतिम निर्णय सामने नहीं आता, तो इससे न्याय मिलने की उम्मीद कमजोर होती है। उनका आरोप है कि उन्हें बार-बार विभागीय प्रक्रिया में उलझाया जा रहा है, जबकि अब तक कार्रवाई की स्पष्ट जानकारी नहीं मिली है।
शिकायतकर्ता ने स्पष्ट किया है कि यदि वर्तमान स्थिति में भी कार्रवाई नहीं होती है, तो अब हाईकोर्ट में याचिका दायर की जाएगी। उनका कहना है कि सरकारी नौकरी में यदि फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल प्रमाणित होता है, तो संबंधित नियमों के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए। वे इस मामले में जांच के निष्कर्ष और प्रशासनिक निर्णय को सार्वजनिक किए जाने की मांग कर रहे हैं।
नए कलेक्टर रणबीर शर्मा से न्याय की उम्मीद
मामले में अब जिले के नए कलेक्टर रणबीर शर्मा से भी शिकायतकर्ता ने उम्मीद जताई है। उनका कहना है कि जिला प्रशासन के मुखिया होने के नाते कलेक्टर मामले का संज्ञान लेकर जांच की वर्तमान स्थिति की समीक्षा करें और नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित कराएं।
पूर्व में तत्कालीन कलेक्टर के स्तर पर फाइल मंगाकर समीक्षा किए जाने का भी उल्लेख किया जा रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि पूर्व में हुई समीक्षा, गठित जांच समिति और 30 जुलाई 2026 के पत्र में कार्रवाई प्रस्तावित किए जाने के बाद मामला किस स्तर पर लंबित है। प्रशासन को यह स्पष्ट करना चाहिए कि सुनवाई की प्रक्रिया पूरी हुई या नहीं, दस्तावेजों के सत्यापन का अंतिम परिणाम क्या है और सक्षम अधिकारी ने इस संबंध में कोई निर्णय लिया है या नहीं।
शिक्षा विभाग की चुप्पी पर सवाल, अब न्यायालय जाने की तैयारी
यदि जांच पूरी हो चुकी है, तो उसके निष्कर्ष और उसके आधार पर की गई कार्रवाई की जानकारी सामने आनी चाहिए। यदि जांच या सुनवाई अभी लंबित है, तो उसके कारणों और संभावित समय-सीमा को स्पष्ट किया जाना चाहिए। आखिर कार्रवाई प्रस्तावित होने के बाद फाइल किस स्तर पर है और निर्णय में देरी क्यों हो रही है?
शिकायतकर्ता ने दो टूक कहा है कि यदि जिला प्रशासन ने मामले में कार्रवाई नहीं की, तो अब हाईकोर्ट में याचिका दायर करने की बारी है। ऐसे में गरियाबंद जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग के सामने चुनौती है कि वे दस्तावेजों की वास्तविक स्थिति, जांच के निष्कर्ष और आगे की कार्रवाई को लेकर स्पष्ट जवाब दें।
अब निगाहें कलेक्टर रणबीर शर्मा के संभावित हस्तक्षेप और शिक्षा विभाग के अगले कदम पर टिकी हैं। क्या प्रशासन मामले की समीक्षा कर लंबित प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगा, या शिकायतकर्ता को न्याय के लिए हाईकोर्ट की शरण लेनी पड़ेगी? इसका जवाब विभागीय कार्रवाई और आधिकारिक निर्णय से ही सामने आएगा।
Author: थनेश्वर बंजारे
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