कार्रवाई के बाद भी नहीं थम रहा रेत माफिया का खेल, 15 अगस्त से पहले फिर धड़ल्ले से अवैध परिवहन!

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राजिम क्षेत्र में खनिज विभाग की कार्रवाई पर उठे सवाल, डंपिंग से लेकर हाईवे तक ट्रैक्टरों से परिवहन का आरोप; टास्क फोर्स की सक्रियता पर भी सवाल

 

गरियाबंद /राजिम-:जिले में अवैध रेत उत्खनन और परिवहन के खिलाफ जिला प्रशासन द्वारा लगातार कार्रवाई किए जाने के दावों के बावजूद रेत माफियाओं के हौसले कम होते नजर नहीं आ रहे हैं। राजिम क्षेत्र के विभिन्न इलाकों में एक बार फिर ट्रैक्टरों के जरिए रेत के अवैध परिवहन और डंपिंग किए जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं। खास तौर पर 15 अगस्त से ठीक एक दिन पहले बड़े पैमाने पर रेत डंप किए जाने और ट्रैक्टरों के जरिए परिवहन किए जाने के आरोप ने प्रशासनिक कार्रवाई की गंभीरता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

 

स्थानीय स्तर पर यह भी आरोप है कि कुछ स्थानों पर खनिज विभाग की कार्रवाई के बावजूद अवैध रेत का कारोबार पूरी तरह बंद नहीं हुआ। कार्रवाई के दौरान रास्ते या अस्थायी संरचनाएं तोड़े जाने के बाद कुछ दिनों तक गतिविधियां थमती हैं, लेकिन इसके बाद कथित रूप से फिर वही सिलसिला शुरू हो जाता है। ऐसे में सवाल यह है कि आखिर कार्रवाई के बावजूद रेत माफियाओं तक सूचना कैसे पहुंचती है और वे दोबारा सक्रिय कैसे हो जाते हैं?

 

ग्राम पंचायत की शिकायतों के बावजूद स्थायी समाधान क्यों नहीं?

 

मामले को लेकर ग्राम पंचायत पितइबंद के सरपंच द्वारा रेत खदान एवं अवैध गतिविधियों के संबंध में कई बार शिकायत किए जाने की बात सामने आई है। शिकायतों के बाद कार्रवाई होने की बात कही जाती है, लेकिन स्थानीय लोगों के अनुसार कार्रवाई का असर लंबे समय तक दिखाई नहीं देता।

 

राजिम से सिंधौरी की ओर लगभग 3 से 4 किलोमीटर तथा राजिम पितइबंद लगभग 2 से 3 किलोमीटर के दायरे में अवैध रेत उत्खनन एवं परिवहन को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। यदि ये आरोप सही हैं तो यह केवल खनिज विभाग की कार्रवाई का विषय नहीं, बल्कि राजस्व, पुलिस और स्थानीय प्रशासन की संयुक्त निगरानी व्यवस्था पर भी प्रश्नचिह्न है।

 

टास्क फोर्स में जिम्मेदार अधिकारी, फिर भी कैसे चल रहा कारोबार?

 

जिले में अवैध खनन एवं परिवहन पर नियंत्रण के लिए गठित टास्क फोर्स में एसडीएम, तहसीलदार, खनिज अधिकारी और थाना प्रभारी सहित संबंधित विभागों के अधिकारी शामिल होते हैं। इसके बावजूद यदि संवेदनशील इलाकों में लगातार अवैध रेत उत्खनन और परिवहन की शिकायतें सामने आती हैं तो टास्क फोर्स की निगरानी और कार्रवाई की प्रभावशीलता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

 

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि संबंधित अधिकारियों की नियमित संयुक्त गश्त हो और डंपिंग स्थलों की लगातार जांच की जाए तो अवैध परिवहन पर काफी हद तक रोक लगाई जा सकती है।

 

समीक्षा बैठकों के निर्देश जमीन पर क्यों नहीं दिखते?

 

अवैध रेत उत्खनन और परिवहन को लेकर जिला स्तर पर आयोजित बैठकों में कार्रवाई के निर्देश दिए जाने की बात सामने आती रही है। लेकिन सवाल यह है कि बैठक में दिए गए निर्देशों का असर जमीन पर कितने दिनों तक रहता है?

 

क्या कार्रवाई केवल कुछ वाहनों को पकड़ने, रास्ते तोड़ने या अस्थायी रोक लगाने तक सीमित रह जाएगी, या फिर अवैध कारोबार की जड़ तक पहुंचकर स्थायी कार्रवाई की जाएगी?

 

स्थानीय लोगों का आरोप है कि कार्रवाई के कुछ दिनों बाद ही गतिविधियां फिर शुरू हो जाती हैं। ऐसे में प्रशासन को केवल वाहन पकड़ने के बजाय रेत के स्रोत, डंपिंग स्थल, परिवहन मार्ग और खरीददारों की पूरी श्रृंखला की जांच करनी चाहिए।

 

राजनीतिक संरक्षण के आरोप, प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती

 

रेत के अवैध कारोबार को लेकर स्थानीय स्तर पर राजनीतिक संरक्षण के आरोप भी लगाए जा रहे हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। बावजूद इसके प्रशासन के सामने यह बड़ा सवाल है कि यदि प्रभावशाली लोगों का संरक्षण नहीं है तो बार-बार कार्रवाई के बाद भी वही गतिविधियां दोबारा कैसे शुरू हो रही हैं?

 

क्या रेत माफिया को किसी राजनीतिक या प्रभावशाली व्यक्ति का संरक्षण प्राप्त है? या फिर विभागीय निगरानी में ही कोई बड़ी चूक हो रही है? इन सवालों का जवाब जिला प्रशासन और संबंधित विभागों को देना चाहिए।

 

पत्रकारों के साथ कार्रवाई का दिखावा या वास्तविक अभियान?

 

कार्रवाई के दौरान मीडिया को साथ लेकर अभियान चलाने के बावजूद यदि अगले ही दिनों में उसी क्षेत्र में अवैध रेत परिवहन शुरू हो जाता है, तो यह भी सवाल उठता है कि कार्रवाई केवल तत्काल प्रभाव दिखाने तक सीमित है या वास्तव में अवैध कारोबार की पूरी श्रृंखला को खत्म करने की रणनीति बनाई गई है।

 

अब जरूरत है कि प्रशासन सिर्फ ट्रैक्टर पकड़ने तक सीमित न रहे, बल्कि अवैध रेत कहां से निकली, किसने निकाली, किस स्थान पर डंप की गई, किसने परिवहन किया और किसे बेची गई—इन सभी बिंदुओं की जांच करे।

 

सबसे बड़ा सवाल यही है—लगातार कार्रवाई के दावों के बावजूद रेत माफिया बार-बार सक्रिय कैसे हो रहे हैं?

 

यदि जिला प्रशासन इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर जिम्मेदार लोगों पर कठोर और स्थायी कार्रवाई करता है, तभी अवैध रेत उत्खनन एवं परिवहन पर वास्तविक अंकुश लग सकेगा। अन्यथा हर कुछ दिनों में कार्रवाई, वाहन जब्ती और रास्ते तोड़ने के बाद फिर उसी तरह रेत माफिया का कारोबार शुरू होने का सिलसिला चलता रहेगा।

थनेश्वर बंजारे
Author: थनेश्वर बंजारे

Dist :- Gariyaband Phone No. :- 7067148964 Gmail :- Banjarethaneshwar544@gmail.com

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