पैरी नदी की बाढ़ ने किसानों की कमर तोड़ी, 80 एकड़ से ज्यादा खेतों में 5-6 फीट मलबा-रेत

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तटबंध क्षतिग्रस्त होने से 40 से अधिक किसान प्रभावित, जिला पंचायत सदस्य इंद्रजीत महाडिक ने एसडीएम को सौंपा ज्ञापन

 

गरियाबंद /राजिम-: पैरी नदी में आई बाढ़ ने ग्राम तर्री के किसानों के सामने गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। 29 जुलाई 2026 को तेज बारिश के बाद सिकासेर बांध से पानी छोड़े जाने के कारण पैरी नदी में तेज बहाव आया, जिससे ग्राम तर्री के पास निर्मित तटबंध क्षतिग्रस्त हो गया। तटबंध टूटने के बाद नदी का पानी खेतों में घुस गया और बड़ी मात्रा में मलबा एवं रेत खेतों में जमा हो गई। इस पूरे घटनाक्रम से 40 से अधिक किसानों की फसल प्रभावित होने तथा भारी आर्थिक नुकसान होने की बात सामने आई है।

 

इस मामले को लेकर जिला पंचायत गरियाबंद क्षेत्र क्रमांक-03 के सदस्य इंद्रजीत महाडिक ने 14 अगस्त को अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), राजिम को ज्ञापन सौंपकर तत्काल जांच और राहत की मांग की है।

 

ज्ञापन में बताया गया है कि तटबंध से लगी किसानों की लगभग 80 एकड़ से अधिक कृषि भूमि में 5 से 6 फीट तक मलबा और रेत जमा हो गई है। इससे खड़ी फसल बर्बाद होने के साथ खेतों की कृषि योग्य स्थिति भी प्रभावित हुई है। किसानों को फसल नुकसान के साथ-साथ खेतों से रेत और मलबा हटाने की अतिरिक्त समस्या का सामना करना पड़ रहा है।

 

जांच दल गठित कर नुकसान का हो आकलन

 

जिला पंचायत सदस्य ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए तत्काल जांच दल गठित किया जाए तथा प्रभावित किसानों की फसल क्षति का वास्तविक आकलन कर उन्हें उचित मुआवजा दिया जाए। उन्होंने कहा कि किसानों की स्थिति को देखते हुए राहत कार्य में किसी प्रकार की देरी नहीं होनी चाहिए।

 

ज्ञापन में यह भी मांग की गई है कि जिस क्षतिग्रस्त तटबंध के कारण खेतों में बाढ़ का पानी घुसा, उसकी पक्की मरम्मत कर उसे सुरक्षित एवं मजबूत बनाया जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटना की पुनरावृत्ति न हो। साथ ही खेतों में जमा 5-6 फीट तक के मलबे और रेत को तत्काल हटाकर किसानों को दोबारा खेती के योग्य भूमि उपलब्ध कराने की मांग की गई है।

 

प्रशासन से जल्द राहत की उम्मीद

 

महाडिक ने प्रशासन से मांग की है कि प्रभावित किसानों को उनके नुकसान का उचित मुआवजा, खेतों का संरक्षण तथा शासन की संबंधित योजनाओं का लाभ दिलाया जाए। अब किसानों की नजर प्रशासन की कार्रवाई पर है। यदि समय रहते खेतों से मलबा-रेत नहीं हटाई गई और तटबंध की मरम्मत नहीं हुई, तो आगामी फसल की तैयारी भी प्रभावित होने की आशंका है।

 

किसानों का कहना है कि बाढ़ से हुआ नुकसान केवल एक मौसम की फसल का नुकसान नहीं है, बल्कि खेतों की उपजाऊ क्षमता और उनकी आजीविका पर भी सीधा संकट है। ऐसे में प्रशासन को तत्काल मौके का निरीक्षण कर ठोस राहत और स्थायी समाधान की दिशा में कदम उठाना होगा।

थनेश्वर बंजारे
Author: थनेश्वर बंजारे

Dist :- Gariyaband Phone No. :- 7067148964 Gmail :- Banjarethaneshwar544@gmail.com

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